कैसे मिला चुनावी चंदा, नहीं बता पा रही भाजपा और कांग्रेस

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नई दिल्ली। देश के प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस ने वर्ष 2018-2019 में मिले चुनावी चंदा का खुलासा नहीं किया। हालांकि इस बात का पता जरूर लगा है कि तीन तीन राष्ट्रीय सहित 22 क्षेत्रीय दलों ने अपना 50 फीसदी चंदा चुनावी बांड के जरिये वसूला है। चुनाव आयोग से मिली जानकारी के आधार पर एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक 25 रानजीतिक पार्टियों ने वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान कुल 1163.17 करोड़ रुपए का चंदा वसूला, जिसमें से 593.6 करोड़ रुपए चुनावी बांड से आया। एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक ब्योरा देने वाले राष्ट्रीय दलों में बसपा, तृणमूल कांग्रेस और बीजद शामिल हैं, जबकि भाजपा और कांग्रेस जानकारी नहीं दे पाई।

चुनाव आयोग की माने तो भाजपा व कांग्रेस समेत 35 राज्यों ने अब तक अपनी आय का ब्योरा नहीं दिया है। इनमें पांच राष्ट्रीय और 30 क्षेत्रीय पार्टियां शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ब्योरा देने वाली 25 पार्टियों ने 893.6 करोड़ रुपए यानी 76.82 फीसदी स्वैच्छिक योगदान, दान और चुनावी बांड से जुटाए गए हैं। वहीं अन्य दान में 305.53 करोड़ रुपए यानी 25 दलों की कुल आय के 26 फीसदी से अधिक राशि प्राप्त की। तीन राष्ट्रीय दलों में केवल तृणमूल कांग्रेस ने चुनावी बांड के माध्यम से मिले दान का खुलासा किया है।

पार्टी को 97.28 करोड़ की राशि मिली है। एडीआर ने कहा कि चुनावी चंदे में चुनावी बांड वर्तमान समय में सबसे अधिक लोकप्रिय हो रहा है। गोपनीयता के कारण इसे काफी पसंद किया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक आय 249.31 करोड़ रुपए ओडिशा के बीजू जनता दली की है। इसके बाद 192.65 करोड़ रुपए के साथ तृणमूल कांग्रेस दूसरे और 188.7 करोड़ रुपए के साथ टीआरएस तीसरे नंबर पर है।

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