Indore: हिंदी भाषा को आज भी नोबेल पुरस्कार का इंतजार है, बेल्जियम से आई लेखिका डॉ राजकुमारी गौतम ने कहा

इंदौर के अभय प्रशाल में आज अंतर्राष्ट्रीय महिला साहित्य समागम की रंगारंग शुरुआत हुई इस कार्यक्रम का आयोजन हिंदी न्यूज़ पोर्टल घमासान डॉट कॉम तथा शहर की प्रतिष्ठित संस्था वामा साहित्य मंच द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है

इंदौर के अभय प्रशाल में आज अंतर्राष्ट्रीय महिला साहित्य समागम की रंगारंग शुरुआत हुई इस कार्यक्रम का आयोजन हिंदी न्यूज़ पोर्टल घमासान डॉट कॉम तथा शहर की प्रतिष्ठित संस्था वामा साहित्य मंच द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है आज के सम्मेलन मैं मुख्य अतिथि थी देश की प्रसिद्ध लेखिका डॉ सूर्यबाला तथा बेल्जियम से पधारी राजकुमारी गौतम ।

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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के प्रचार प्रसार में तकनीकी की भूमिका विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ राजकुमारी गौतम ने कहा कि भाषा के माध्यम से किस तरह से साहित्य का विस्तार होता चला गया और कागज के निर्माण के साथ ही आज की आधुनिक टेक्नोलॉजी तक भाषा का विकास संभव हुआ है और साहित्य जन जन तक पहुंचा है उन्होंने कहा कि व्यापार के तरीके बदल रहे हैं अनावश्यक खर्चे कम हो रहे हैं संगठन एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अभूतपूर्व उन्नति ने दुनिया को एक सम्मिलित परिवार बना दिया है।

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उन्होंने बताया कि आज तक नोबेल पुरस्कार 114 बार में 118 लोगों को दिया गया है इसमें अंग्रेजी में 29, फ्रेंच 15 जर्मन 13 स्पेनिश 11 और इटालियन 6 को दिया गया है यूरोप की भाषाओं के अलावा सिर्फ 25 बार दूसरी भाषाओं में लिखने वालों को दिया गया है जिसमें दो बार जापानी साहित्यकारों को लेकिन हिंदी साहित्य में अभी भी इस पुरस्कार का इंतजार है ।