Sanjeevani Multispeciality Hospital : अंबिकापुर के विवादित संजीवनी मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल का मामला अब और गंभीर हो गया है। घमासान डॉट कॉम ने अपनी पिछली रिपोर्ट में खुलासा किया था कि यह अस्पताल जिस जमीन पर संचालित हो रहा है, वह मूल रूप से आदिवासी भूमि है। राजस्व रिकॉर्ड और प्रशासनिक आदेशों के अनुसार संबंधित भूमि का आवंटन निरस्त (कैंसिल) किया जा चुका है, इसके बावजूद अस्पताल का संचालन जारी है। यही तथ्य स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर रहा है — आखिर आवंटन रद्द होने के बाद भी व्यावसायिक गतिविधि कैसे जारी है?
पिछली रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद यह मुद्दा सिर्फ जिला स्तर तक सीमित नहीं रहा। इस पूरे मामले की शिकायत दस्तावेजों सहित प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पहले ही भेजी जा चुकी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भूमि आवंटन निरस्तीकरण के बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा संचालन जारी रखा गया है और प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच, भूमि उपयोग की वैधता की समीक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।
कलेक्टर अजीत वसंत का बयान
जब इस विषय पर सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत (IAS Ajeet Vasant) से चर्चा की गई तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा:
“आप लिखित में शिकायत दीजिए, उसके बाद जांच करवाई जाएगी।”
कलेक्टर का यह बयान अब इस पूरे मामले का सबसे अहम बिंदु बन गया है।
PMO में हुई शिकायत
Complaint – Sanjeevani Multispeciality Hospital
क्या प्रशासन स्वतः संज्ञान नहीं ले सकता?
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि—
- जब भूमि आवंटन निरस्त किए जाने का आदेश प्रशासनिक रिकॉर्ड में मौजूद है,
- जब मामला सार्वजनिक हो चुका है,
- जब शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी है,
तो क्या जिला प्रशासन स्वयं संज्ञान लेकर जांच शुरू नहीं कर सकता?
प्रशासनिक व्यवस्था में कई ऐसे उदाहरण रहे हैं जहाँ जिला प्रशासन ने मीडिया रिपोर्ट या सार्वजनिक सूचना के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की है। ऐसे में इस मामले में लिखित शिकायत की शर्त क्यों रखी जा रही है — यह सवाल चर्चा का विषय बन गया है।
क्या प्रक्रिया की आड़ में देरी?
कलेक्टर का कहना है कि औपचारिक जांच के लिए लिखित शिकायत आवश्यक है।
लेकिन सवाल यह है कि यदि राजस्व आदेश और निरस्तीकरण की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है, तो उसके बाद भी संचालन जारी रहने पर प्रशासन की ओर से स्वतः निरीक्षण क्यों नहीं किया गया?
क्या यह केवल प्रक्रिया की औपचारिकता है?
या फिर कार्रवाई टालने का तरीका?
अब आगे क्या?
अब इस मामले में तीन संभावनाएँ साफ दिख रही हैं:
- शिकायतकर्ता कलेक्टर को औपचारिक लिखित आवेदन देगा।
- PMO स्तर से राज्य प्रशासन को निर्देश जारी हो सकते हैं।
- अस्पताल संचालन और भूमि स्थिति की विस्तृत जांच शुरू हो सकती है।
फिलहाल एक बात स्पष्ट है — मामला अब सिर्फ स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बन चुका है।
इस मामले में घमासान डॉट कॉम लगातार खुलासे करता रहेगा…











