अंतर्राष्ट्रीय महिला साहित्य समागम में बोली डॉ राजकुमारी गौतम, हिंदी भाषा को आज भी नोबल पुरस्कार का इंतजार

आज तक नोबेल पुरस्कार 114 बार में 118 लोगों को दिया गया है इसमें अंग्रेजी में 29, फ्रेंच 15 जर्मन 13 स्पेनिश 11 और इटालियन 6 को दिया गया है यूरोप की भाषाओं के अलावा सिर्फ 25 बार दूसरी भाषाओं में लिखने वालों को दिया गया है जिसमें दो बार जापानी साहित्यकारों को लेकिन हिंदी साहित्य में अभी भी इस पुरस्कार का इंतजार है ।

इंदौर: इंदौर के अभय प्रशाल में आज अंतर्राष्ट्रीय महिला साहित्य समागम की रंगारंग शुरुआत हुई इस कार्यक्रम का आयोजन हिंदी न्यूज़ पोर्टल घमासान डॉट कॉम तथा शहर की प्रतिष्ठित संस्था वामा साहित्य मंच द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है आज के सम्मेलन मैं मुख्य अतिथि थी देश की प्रसिद्ध लेखिका डॉ सूर्यबाला तथा बेल्जियम से पधारी राजकुमारी गौतम कार्यक्रम की शुरुआत हुई सरस्वती वंदना के साथ इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत किया गया बाद में वामा साहित्य मंच की चेयर पर्सन पदमा राजेंद्र ने कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट की जिसके पश्चात लेखिका ज्योति जैन में अभी तक की कार्रवाई का ब्यौरा दिया और बताया कि किस तरह से इंदौर में महिला साहित्य समागम की शुरुआत हुई जो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है ।

अंतर्राष्ट्रीय महिला साहित्य समागम द्वारा प्रकाशित स्मारिका शब्द समागम का विमोचन

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आज के सत्र में वामा साहित्य मंच द्वारा प्रकाशित शब्द समागम का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया इस स्मारिका में संस्था की गतिविधियों के साथ ही संस्था से जुड़ी सभी लेखिकाओं की रचनाएं प्रकाशित की गई है ।

तकनीकी माध्यमों से भाषा का विकास संभव है, बेल्जियम से आई लेखिका डॉ राजकुमारी गौतम ने कहा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के प्रचार प्रसार में तकनीकी की भूमिका विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ राजकुमारी गौतम ने कहा कि भारत जापान एवं यूरोपीय संघ में भारतीय भाषाएं संस्कृति के प्रचार प्रसार व शोध में सहयोग देने का कार्य चल रहा है इसके अलावा भारत की संस्कृति में इच्छुक लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का एवं यूरोपीय संघ के विश्वविद्यालयों में तकनीकी सहयोग देने का कार्य भी रिसर्च फाउंडेशन के माध्यम से किया जाता है उन्होंने बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम योग तथा प्रणब शिविर और शोध जनों की श्रंखला एवं पर्यटन का सहयोग भी इसमें शामिल है l

हिंदी भाषा को आज भी नोबेल पुरस्कार का इंतजार है

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के प्रचार प्रसार में तकनीकी की भूमिका विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ राजकुमारी गौतम ने कहा कि भाषा के माध्यम से किस तरह से साहित्य का विस्तार होता चला गया और कागज के निर्माण के साथ ही आज की आधुनिक टेक्नोलॉजी तक भाषा का विकास संभव हुआ है और साहित्य जन जन तक पहुंचा है उन्होंने कहा कि व्यापार के तरीके बदल रहे हैं अनावश्यक खर्चे कम हो रहे हैं संगठन एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अभूतपूर्व उन्नति ने दुनिया को एक सम्मिलित परिवार बना दिया है। उन्होंने बताया कि आज तक नोबेल पुरस्कार 114 बार में 118 लोगों को दिया गया है इसमें अंग्रेजी में 29, फ्रेंच 15 जर्मन 13 स्पेनिश 11 और इटालियन 6 को दिया गया है यूरोप की भाषाओं के अलावा सिर्फ 25 बार दूसरी भाषाओं में लिखने वालों को दिया गया है जिसमें दो बार जापानी साहित्यकारों को लेकिन हिंदी साहित्य में अभी भी इस पुरस्कार का इंतजार है ।

महिला लेखन ने बहुत संघर्षों के बाद आज अपने लिए खुद जमीन बनाई

देश की जानी मानी लेखिका डॉक्टर सूर्यबाला का कहना है कि महिला लेखन को पहले दोयम दर्जे का समझा जाता था लेकिन धीरे-धीरे महिला लेखन ने खुद अपनी जमीन तैयार की ।महिला लेखन ने साहित्य के क्षेत्र में गहरी पैठ बनाई है आज हम बेहद दुर्दांत समय के दौर से गुजर रहे हैं और इसी को हमें साहित्य का विषय बनाना है आज सब दूर साहित्य का बाजार खुल गया है और डिमांड तथा सप्लाई का खेल चल रहा है आपको सब कुछ लिखने के लिए कहा जा रहा है लेकिन सवाल इस बात का है कि हम सब कुछ क्यों लिखें ।
आज लेखिकाओं के सामने यही सवाल है कि वह बाजार के अनुसार लिखें या अपने विवेक का उपयोग करें क्योंकि बाजार तो उन्हें सब कुछ लिखने के लिए बात कर रहा है।हास्य से शुरू हुआ साहित्य व्यंग तक पहुंच गया है और आज व्यंग की आवश्यकता को सबसे ज्यादा महसूस किया जा रहा है उन्होंने कहा कि आज की स्त्री गलत को स्वीकार नहीं करती ऐसी स्त्री को में समर्थ स्त्री मानती हूं आज अश्लीलता का सबसे ज्यादा शिकार स्त्री लेखन हुआ है पुरुष का अहंकार स्त्री लेखन को अश्लील बनाने में जोर देता रहा है मैं ऐसा मानती हूं कि कोई भी विषय अश्लील नहीं होता उन्होंने कहा कि स्त्री विमर्श की बजाय मनुष्य विमर्श होना चाहिए। आवश्यकता इस बात की है कि आज स्त्री अपने आप को ऊंचा करके देखें स्त्री को उसकी गरिमा देना ही होगी आज की दुनिया को बेहतर बनाने का कौशल सिर्फ स्त्री के पास है ।

अहिल्याबाई के शहर में इतना बड़ा आयोजन गर्व की बात है

अंतर्राष्ट्रीय महिला साहित्य समागम में स्त्री अस्मिता को लेकर प्रसिद्ध लेखिका जया सरकार ने कहा – अहिल्याबाई से लेकर मंडन मिश्र की पत्नी तक ने स्त्री अस्मिता और स्त्री की गरिमा को समय-समय पर साबित किया है उन्होंने कहा कि गंगूबाई काठियावाड़ी भी स्त्री अस्मिता का प्रतीक है इस मौके पर उन्होंने एक सशक्त कविता भी सुनाई ।

इस कविता में स्त्री के अस्तित्व और उस पर उठते सवालों को रेखांकित किया गया है, इंदौर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से उनका गहरा रिश्ता रहा है उनका जन्म तो छत्तीसगढ़ में हुआ है लेकिन मध्य प्रदेश से भी उनका गहरा नाता है, स्त्री की अस्मिता को समझने के लिए हमें उन पात्रों को भी देखना होगा जिन्होंने संघर्ष का जीवन जिया है । इससे पहले लेखिका ज्योति जैन ने अपनी लघु कथाओं के माध्यम से बताया कि किस तरह से उनके पात्र अपने जीवन को जीने के लिए संघर्ष करते हैं उन्होंने कहा कि आज का महिला लेखन वास्तव में बहुत सार्थकता साबित कर रहा है ।

स्त्री लेखन को दायरो की आवश्यकता नहीं है

स्त्री अस्मिता को लेकर अपने विचार रखते हुए मनीषा कुलश्रेष्ठ ने कहा कि अब हमें दायरों की आवश्यकता नहीं है स्त्री विमर्श और पुरुष विमर्श जैसी विभाजन रेखा को तोड़ना होगा उन्होंने कहा कि बचपन में हमें दायरों में रहना सिखाया जाता था लेकिन मेरा यह कहना है कि स्त्री लेखन किसी का भी मोहताज नहीं है ।

उन्होंने कहा कि लेखन को कभी भी विभाजित नहीं किया जाना चाहिए उसी तरह से उन्होंने कहा कि उन्हें अभिमन्यु अनत जो कि मारीशस में रहते थे वह कभी प्रवासी नहीं लगे । उन्होंने कहा कि कहानियों में पात्र सबक सिखाते हैं ऐसा ही वास्तविक जीवन में भी होना चाहिए इस मौके पर उन्होंने सशक्त कविता का वाचन भी किया पहले कई महिलाएं पुरुषों के नाम से लेखन करती थी भारतेंदु की प्रेरणा मल्लिका रही है । स्त्री की जिजीविषा गुलाबों में से कांटे निकाल देती है। पहले महिलाएं लिखने के बाद उसे आटे के डब्बे में दबा देती थी लेकिन आज स्त्री लेखन मुखर होकर सामने आया है । लेखिकाओं की पूरी जमात जो कृष्णा सोबती से शुरू होती है उसका सिलसिला आज तक जारी है l