धार: कारम डैम के निर्माण में जानिए कहां हुई चूक, 304 करोड़ की लागत से बना बांध कैसे चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट

धार कारम डैम के निर्माण के दौरान कही चूक हो सकती है। यह डैम करीब 304 करोड़ की लागत से बना है। लेकिन अब बांध से पानी रिसने के कारण इसके निर्माण में उपयोग किये जाने वाले सामन की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे है।

मध्यप्रदेश में धार में बांध से पानी का रिसाव होने के चकते स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई हैं। इसको लेकर सरकार भी सजग हो गई है कई गांवों को खाली करवाकर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पंहुचाया गया है। बांध से रिसाव होने के चलते सराकर और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। ठेकेदार की गलती की वजह से यह घटना बेहद गंभीर रूप ले सकती है और इसका खामियाजा बाकी लोगों को भुगतना पड़ सकता है। हालांकि स्थिति बेहद नाजुक बनी है, इसको लेकर मौके पर मंत्री डेरा डाले बैठे हुए है और पल -पल की स्थिति की जानकारी देकर नजर बनाए हुए है।

धार जिले के धरमपुरी तहसील में भरूड़पूरा और कोठीदा के बीच कारम नदी पर 304 करोड़ रुपये की लागत से बन है। लेकिन अब इसके बहकर टूटने का खतरा बढ़ गया है। कभी यह डैम टूट सकता है, हालांकि सरकार इसे ठीक कर रही है लेकिन डैम कितना साथ दे पाएगा ये कहा नहीं जा सकता हैं। किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने कमर कस ली है और सेना ने भी मोर्चा संभाल लिया है। जब से डैम से पानी लीकेज होने की सूचना मिली तब से सरकार की नींद भी उड़ गई हैं। इस दौरान डैम निर्माण में भ्रष्टाचार करने का भी आरोप लगा है।

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डैम को लेकर यह गड़बड़ी आई सामने

विशेषज्ञों के अनुसार बांध को लेकर कई गड़बड़ी सामने आई है। डैम बनाने के लिए मिट्टी की लेयर को मेंटेन करना ज़रूरी होता है और निर्माण के दौरान इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया। जल्दबाजी में बांध की दीवार के निर्माण में मिट्टी में पानी का अनुपात और उसे कम्पैक्ट करने में भी लापरवाही की गई होगी।
बांध की दीवार का निर्माण करते समय हर्टिंग जोन में काली मिट्टी बीच मे डाली जाती हैं। इससे मिट्टी की पकड़ मजबूत होती हैं और पानी लीकेज भी नहीं होता है। फिर केसिंग जोन में दोनों साइड पत्थर वाली मुरम डालते हैं। हो सकता है इस बात का भी ध्यान डैम निर्माण के समय नहीं रखा गया हो। अगर नियम के मुताबिक बात करें तो 15 सेंटीमीटर तक मिट्टी की लेयर को मेंटेन करते हैं और 1 लेयर में करीब 6 से 7 लेयर होती है। इसको रोलर चलाकर मेंटेन किया जाता हैं यह भी कारण हो सकता है कि इसमें भी लापरवाही की गई हो या इस बात का ध्यान नहीं दिया गया हो। क्योंकि यह भी बात सामने आ रही है कि स्थानीय रहवासियों ने बांध के निर्माण के समय दीवार में मिट्टी में बड़े पत्थर डालकर निर्माण करने का आरोप लगाया है। इस बात के सामने आने के बाद निर्माणाधीन बांध में पानी रिसने के ये कारण हो सकते।

आपको बता दें कि इस पूरे मामले में विभाग और एजेंसी की बड़ी गड़बड़ी दिख रही है। क्योंकि बरसात के चलते 31 मई तक बांध का निर्माण कार्य पूरा होना था, लेकिन बरसात शुरू होने के बाद भी यह डैम निर्माणाधीन स्थिति में ही था। इस बांध के निर्माण में निर्माण के समय मोनिटरिंग को लेकर कोई रुझान नहीं देखा गया। इसके कारण अब 40 हजार लोगों की जान और रोजी रोटी खतरे में आ गई है।