मुख्यमंत्री पद के चेहरे पर टिका दिल्ली चुनाव, कांग्रेस के नाम रहा ये रिकाॅर्ड

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नई दिल्ली।
नई दिल्ली। 8 फरवरी को होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने अपना चुनावी प्रचार तेज कर दिया है। चुनाव प्रचार के दौरान यदि मुख्यमंत्री पद के चेहरे की बात करें, तो सिर्फ आम आदमी पार्टी की ओर मुख्यमंत्री पद के लिए अरविंद केजरीवाल का चेहरा जनता के सामने रखा है, जबकि कांग्रेस और भाजपा अपने नेता का चेहरा नहीं बता पाई। चुनाव में कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित द्वारा करवाए कामों के बल पर चुनावी मैदान में है, जबकि भाजपा हिंदुत्व और पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे को सामने रखकर चुनाव लड़ रहे हैं।

1993 से अबतक दिल्ली में छह विधानसभा चुनाव हुए है जिनमें से भाजपा को जीत मात्र एक बार ही हाथ आई है। 1993 में हुए चुनाव के दौरान बीजेपी ने मुख्यमंत्री के चेहरे के बिना ही चुनाव लड़ा था जिसमें उसे जित हासिल हुई। 1993 के पहला विधानसभा चुनाव भाजपा ने मदनलाल खुराना की अगुवाई में लड़ा गया था, इसके बावजूद आलाकमान ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया था।

वहीं जब अगले विधानसभा चुनाव 1998 में अगले सीएम के रुप में सुषमा स्वराज को बताया तो ये दांव भाजपा को जरा भारी पड़ गया। यहां भाजपा को 15 सींटों से ही संतुष्ट होना पड़ था। इसके बाद 2003 में शीला दीक्षित के सामने भाजपा को मदनलाल खुराना का चेहरा लाना घाटे का सौदा साबित हुआ। इस चुनाव में भी भाजपा को हार का मुंह ही देखने को मिला। 2013 में डॉ. हर्षवर्धन को सीएम फेस बनाकर भाजपा ने चुनाव लड़ा यहां हर्षवर्धन भाजपा को 31 सीटें दिलाने में सफल रहे लेकिन बहुमत से दूर होने के कारण यहां भी हार ही मिली।

वहीं 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने किरण बेदी को सीएम फेस बनाकर चुनावी मैदान में उतारा लेकिन यह पैतरा भी बुरी तरह फैल हो गया और भाजपा को महज 3 सीटें ही मिल सकीं। वहीं इस बार भी भाजपा ने अब तक सीएम के चेहरे पर से पर्दा नहीं उठाया है। भाजपा के लिए सीएम के चेहरे को सामने रख कर चुनाव लड़ना अब तक भारी ही पड़ा है, ऐसे में ये देखना अब और भी दिलचस्प होगा कि इस बाद बिना सीएम के चेहरे के चुनाव में भाजपा क्या कमाल करती है।

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