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अगर आपके मन में भी है वास्तुशास्त्र के प्रति भ्रम तो जरूर पढ़िए

Posted on: 26 Jun 2018 10:58 by shilpa
अगर आपके मन में भी है वास्तुशास्त्र के प्रति भ्रम तो जरूर पढ़िए

नई दुनिया : वास्तु का अर्थ इमारत या आवास से संबधित विज्ञानं होता है। कई बार हमें लगता है हमारे घर की कुछ दीवारे, कोने, या रचना हमारा अतीत या भविष्य कैसे दिखा सकती है ? हर कोई जानना चाहता है वास्तु शास्त्र क्या है और यह हमारे भविष्य को कैसे दर्शाता है। क्या है वास्तुशास्त्र केवल एक कल्पना है या कोई सच्चाई है। तो आईये हम जानते है वास्तुशास्त्र क्या है।

वास्तुशास्त्र एक प्राचीन भारत में खोजा गया एक विज्ञान है। एक ऐसा विज्ञान जो गुरुत्वाकर्षण बल तथा पृथ्वी के चुम्बकीय बल के साथ पांचो तत्वों और वातावरण से उत्सर्जित बल से हमारे ऊपर नियंत्रण करता है. ये हमारे शारीरिक स्वास्थ्य, संतान, आर्थिक स्थिति, मानसिक स्वास्थ्य, नेतृत्व, हमारा आचरण, दुसरोंका हमारे प्रति आचरण आदि को संतुलित करता है।

वास्तुशास्त्र का दुष्प्रभाव कितना भयानक हो सकता है ये हम महाभारत की कहानी से जान सकते है। ऐसा कहा जाता है माया सभा.. जहा कौरवों और पांडवों के बिच चौरस खेला गया था उसके परिसर के मध्य एक तालाब था और वास्तु के अनुसार परिसर के केंद्र में कोई भी जलस्त्रोत एक प्रमुख वास्तुदोष है। जिसकी वजह से इतनी बड़ी महाभारत हुई और कौरवों और पांडवों की लगभग पूरी पीढ़ी का नाश हो गया।

कश्यप, विश्वकर्मा, वासुदेव, वशिष्ठ, अत्री और गर्ग वस्तुशास्त्र के प्राचीन संत थे।

रामायण,महाभारत,गीताभागवत,मस्त्यापुरण,अग्निपुराण आदि प्राचीन ग्रंथो में वास्तुशास्त्र के सन्दर्भ मिलते है।

प्राचीन समय में वास्तुशास्त्र का इतना महत्व था की माता सीता को लंका से लाने के लिए जो रामसेतु बना उसका निर्माण भी वास्तुशास्त्र के अनुसार किया गया था। इतनाही नही रामायण के किष्किन्धा काण्ड से पता चलता है की जिस गुफा में भगवान राम ने आराम किया था उसकी रचना भी वास्तु के अनुसार थी।

वास्तु सिर्फ दिशाओं का नही बल्कि मकान के अंदर की रचना, बाहर की ढलान, आसपास का क्षेत्र, पास वाली सडक ,अस्पताल या और कुछ सब का ध्यान रखा जाता है।

एक बार आप अच्छे से वास्तुशास्त्र के बारे में जान ले ताकि भविष्य में इसकी वजह से आने वाली परेशानियों से बचा जा सके।

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