क्यों किसान दूर हो रहे है कर्जे से, वरिष्ट पत्रकार अशोक वानखेड़े की टिपण्णी

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किसानों का खेती पर से भरोसा उठता जा रहा है, वह अब खेती को घाटे का सौदा मानने लगा है। और खेती के लिए कर्जा लेने में आनाकानी कर रहा है।

इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि देश में जो वित्तीय संस्थाए किसानों को खेती के लिए कर्जा देती है, उसमे भारी कमी देखने को मिली है।

आरबीआई की एक तजा रिपोर्ट के मुताबिक देश में एग्रीकल्चर क्रेडिट ग्रोथ 1963 के स्तर पर पहुँच गई है, जो कि पिछले पांच दशको से सबसे कम है। किसानो का खेती के लिए कर्ज न लेना या वित्तीय संस्थाओं द्वारा कर्ज न देना ये एक गंभीर मसला है।

आखिर क्यों किसान भाग रहे हैं कर्जा लेने से? क्यों बैंक नहीं दे रही है किसानों को कर्जा ? देश के किसानों के साथ ये खिलवाड़ कब तक ? इन सवालों के जवाब जानने के लिए देखिए वरिष्ट पत्रकार अशोक वानखेड़े की टिप्पणी।