आओ दूसरों को प्रकाशवान बनाएं

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– निधि जैन

तमस को पराजित कर प्रकाश ,उजियारे से संसार को आलोकित का प्रयास करने वाला त्योहार है दीपावली।
महलों में, कुटियों में जगमगाते दीयों की पंक्ति अमावस की गहन रात्रि के अंधकार को पराजित करने का साहस करती है … मनुष्य की इच्छा शक्ति का परिचायक है जगमगाती दीपमाला ।
हे परम शक्ति मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो ….जब हम सब में परमात्मा का अंश है सब में ईश्वर मौजूद है तो प्रकाश की ओर चलने की कोशिश हमें स्वयं करनी होगी ..हमारे शास्त्र ,मनीषी ,गुरु ,नीतिकारक इन सब प्रकाशपुंज से रोशनी ले कर अपने मन मंदिर में दीप जलाएं
कितनी भी विषम परिस्थिति आ जाए बूंद की भांति ही सही लेकिन छोटी-सी कोशिश की शुरुआत बदलाव ला सकती है तो लाख असफलताओं ,निराशाओं के बाद भी एक शुरुआत अवश्य की जानी चाहिए ।यह सब तो प्रतीक है माध्यम है हमें संकल्पित बनाने के ..प्रकाश का यह त्योहार नीतिपरक ज्ञान देने के साथ धार्मिक व्यावहारिक प्राकृतिक सामाजिक उपायों द्वारा जीवन को सुगम, सरल और मनुष्य को उत्सव धर्मी बनाता है अवसाद के पलों में भी हर्षोल्लास से जीने की राह दिखाता है वही शब्द वही दीप वही प्रकाश वही अंधकार वही किन्तु हर नया अर्थ नया उजास नया प्रयास नया विश्वास ही हमें विजय दिलाता है अपने अंतर्मन में छुपे नकारात्मक विचारों को सकारात्मक सोच दिखाता है
मन की उलझनों भरी काली रातों में उजयारी भोर की आस दिखाता है जैसे छोटे से दीपक की लौ भी नीरव अंधकार के अहम को तोड़ती है वैसे ही आशा की नन्हीं किरण हमारे उत्साह को संचालित करती है बदलती दुनिया के साथ हर वर्ष दीप पर्व नए कलेवर नए रंग रूप के साथ आता है आज के संदर्भ में मुझे गौतम बुद्ध का सूक्ति वाक्य अत्यधिक प्रभावी लगता है अप्प दीपो भव व अर्थात अपना दीपक स्वयं बनों स्वयं प्रकाशित हो कर अपने साथ दूसरों को भी प्रकाशित करें राह दिखाएं
हमें द्वीप से प्रेरणा लेकर स्वतः ही अपने मन के अंधकार ज्ञान से मिटाने का प्रयास करना होगा किसी पर आश्रित रहने से बेहतर है हम छोटा सा ही सही प्रयास तो करें छोटे छोटे क़दम बढ़ाकर ही बड़ें लक्ष्य को पाया जा सकता है दीपों की पंक्तियां सुंदरता के साथ तिमिर हटा कर प्रकाश फैलाती हैं आकर्षण पैदा होता है। ये दीप पंक्तियां सबको मोहती है
हां हम से सक्षम कोई पथ प्रदर्शक मिलता है या मदद को हाथ बढ़ाता है तो साथ मिलकर दूसरेन अशक्तजनों का अंधियारा दूर करें ,यही सही मायने में तमसो मा ज्योतिर्गमय की परिभाषा होगी कि स्वयं प्रकाशित होकर दूसरों को प्रकाशवान बनाएं।

वरिष्ठ लेखिका हैं।

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