दुनिया की सबसे दूसरी अर्थव्यवस्था वाला देश चीन के हालात बेहाल होते जा रहे है। इसकी वजह जीरो-कोविड नीति बन रही है। कड़ी कोविड पाबंधियों के चलते लोग सड़कों पर इनका विरोध कर रहे है। वहां पर हालात भयावह हो गए है। अस्पतालों मेें जगह नही मिल रही है तो वही श्मशानों में शव के अंतिम संस्कार के लिए बड़ी-बड़ी कतारो में लगता पड़ रहा है।

देश की आर्थिक विकास दर (China Economic Growth Rate) के आंकड़े जारी किए गए हैं। इनके मुताबिक, साल 2022 में चीन की इकोनॉमिक ग्रोथ रेट 3 फीसदी रही है।

इस रफ्तार से बढ़ी चीन की इकोनॉमी

चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स (China NBS) द्वारा जारी आंकड़ों को देखें तो बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में विकास दर सालाना आधार पर 2.9 फीसदी रही, जबकि यह इससे पहले की तीसरी तिमाही में 3.9 फीसदी रही थी। ड्रैगन ने साल 2022 के लिए करीब 5.5 फीसदी का विकास लक्ष्य निर्धारित किया था, जो वर्ष 2021 में चीन की जीडीपी 8.1 फीसदी से काफी कम था।

लेकिन चीनी सरकार की जीरो-कोविड नीति ने इसे कमजोर कर दिया है, जिसने विनिर्माण गतिविधि और खपत पर ब्रेक लगा दिया है और इसका नतीजा सामने है।

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भारत की अनुमानित GDP से आधी

चीन में बीते साल आर्थिक विकास दर की जो रफ्तार रही है. वो भारत सरकार के साल 2022 में जीडीपी की अनुमानित दर 7 फीसदी के आधी से भी कम है। विश्व बैंक (World Bank) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी भारत के लिए अपना पूर्वानुमान 6.9 फीसदी पर तय किया है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में चीन का सकल घरेलू उत्पाद 1,21,020 अरब युआन या 17,940 अरब डॉलर रहा।

जनसंख्या में भी आई गिरावट

इस बीच चीन की जनसंख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है. 60 साल में पहली बार देश की जनसंख्या में कमी आई है। साल 2021 में चीन में जन्मदर 7.52 बच्चे प्रति एक हजार लोग थी लेकिन बीते साल यह घटकर 6.77 बच्चे प्रति एक हजार हो गई। इससे चीन की जनसंख्या में 10 लाख से ज्यादा बच्चे कम पैदा हुए। चीन में मृत्युदर भी साल 1976 के बाद सबसे ज्यादा है। चीन में 2022 में मृत्युदर 7.37 मौतें प्रति एक हजार लोग रही।