जम्मू-कश्मीर के विभाजन पर चीन ने जताई आपत्ति, भारत ने दी नसीहत

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ravish kumar

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से धरा 370 हटाए जाने के बाद यूरोपियन सांसदोें के दौरे को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। जिसका जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय ने गुरूवार को कहा है कि ‘ये एमईए (विदेश मंत्रालय) का अधिकार है कि सिविल सोसायटी के लोगों को वो आमंत्रित करे. कई बार लोग अपने निजी यात्रा पर आते हैं। कई बार राष्ट्रीय हित में हम उनको आधिकारिक तौर पर एंगेज करते हैं, भले ही वे प्राइवेट विजिट पर क्यों न हों।‘

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘एमईपी (यूरोपीय सांसद) ने भारत को जानने समझने की इच्छा जताई थी। जब उन्होंने अलग-अलग माध्यमों से संपर्क किया, उनमें विभिन्न विचारधारा के लोग थे। उन्हें कश्मीर जाने में सपोर्ट किया गया था।‘

वहीं चीन ने कश्मीर को दो केन्द्र शासित राज्यों में विभाजित किए जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे ‘गैरकानूनी और निरर्थक‘ बताया है। चीन ने कहा कि भारत द्वारा चीन के कुछ हिस्से को अपने प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में ‘शामिल‘ करना हमारी संप्रभुता को ‘चुनौती‘ है। जिस पर भारत ने दो टूक जवाब देते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं जिसको लेकर किसी दूसरे देश को टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

करतारपुर काॅरिडोर को लकर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि तीर्थयात्रा को लेकर समझौता किया गया है और गृह मंत्रालय की ओर से पहले जत्थे की सूची पाकिस्तान से साझा कर ली है। हालांकि उन्होने अब तक इसका कोई जवाब नहीं दिया है। फिलहाल उद्घाटन की तैयारियां की जा रही है। इस बारे में अंतिम फैसला होने के बाद हम साझा करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार करतारपुर साहिब जाने वाले पहले जत्थे में केंद्र और राज्य सरकार के नेताओं ने नाम हैं।

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