ये जो तेंदुआ और उसकी फेमिली है न जो जबलपुर के नया गांव इलाके में घूम रही है वो बड़ी ही धार्मिक, सीधी साधी, भोली भाली है, हर ‘पूरनमासी’ पर बाकायदा ‘उपवास’ रखती है सुबह शाम नहा धोकर ‘रामायण’ की चार ‘चौपाई’ पढ़ती है और उसके बाद ही पानी पीती हैl पूरी फेमिली ‘शुध्द शाकाहारी’है घास फूस और पेड़ों की पत्तियां खाकर अपना और अपने बाल बच्चो का पेट भरती है हां कभी कभी जब ‘नॉन वेज’ खाने का मन करता है तो नया गांव के इलाके से नगर निगम का बोझ हल्का करने के उद्देश्य से किसी आवारा कुत्ते या बिल्ली को मारकर ‘फीस्ट’ मना लेती है लेकिन आज तक उसने किसी इंसान पर हमला नहीं किया और न ही कभी करेगी, ये बात हम लोगों ने बाकायदा तेंदुए के साथ बैठकर तय कर ली हैl

तेंदुए और उसकी फेमिली ने हम लोगों को सौ रूपये के स्टाम्प पेपर पर ये ‘एफेडेविट’ दे दिया है कि हम और हमारी फैमिली भले ही भूख से तड़फ तड़फ कर जान दे देंगे पर इसी इंसान की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखेंगे और उसके ही एफिडेविट कर भरोसा कर हम लोग यानि हमारा वन विभाग आपके सामने ये हफनमा पेश कर रहा है कि ये तेंदुआ न तो आदमखोर है ना ही उसके बाल बच्चे, इसलिए नया गांव के लोगों को बाकायदा तेंदुए के साथ सामजस्य बैठा कर उसके साथ ही जीना सीखना पडेगाl

ये लब्बो लुआब है उस जवाब का जो वन विभाग वालों ने नयागांव के रहवासियों की तरफ से तेंदुए के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए जनहित याचिका के सम्बन्ध में हाईकोर्ट में दिया है, अब याचिका लगाने वाले की तरफ से जो वकील साहेब पैरवी कर रहे है उनका कहना है कि वन विभाग वालों ने जो जवाब दिया है वो बड़ा ही बेतुका और अटपटा है वकील साहेब आप तो बरसों से वकालत कर रहे हो सरकारी जवाब तो हमेशा से ही ऐसी बेतुके और अटपटे होते हैं इसलिए इस पर रंज मत करोl यदि वन विभाग की मान ले तो नयागांव के निवासियों को अब तेंदुए और उसकी फेमिली से दोस्ती कर लेना चाहिए, जब कभी रास्ते में या बंगले के आसपास घूमता फिरता दिख जाये बाकायदा उसे सम्मान के साथ घर पर लेकर आओ, चाय काफी पिलाओ राजनीति पर चर्चा करो, कंगना रिया चक्रवर्ती और वॉलीवूड के ‘ड्रग रेकिट’ पर उसके विचार जानो और जब घंटे दो घंटे बाद जब वो अपने घर जाने लाए तो उसे ‘गुडबाय’ जरूर कहो,वैसे बढ़िया रास्ता दिखा दिया है

वन विभाग वालों ने तमाम दूसरे डिपार्टमेंट वालों कोl अब यदि आपने आवारा सूअरों की शिकायत की तो नगर निगम से यही उत्तर मिलेगा कि अब आप लोग सूअरों के संग रहने की आदत डाल लो और फिर वे आपका बिगाड़ भी क्या रहे हैं नगर निगम की कचरा गाड़ी जो कई कई दिनों तक कचरा उठाने नहीं आती है तो ये बेचारे सुअर ही तो कचरा खाकर उनका काम हल्का करते हैं, यदि आवारा कुत्तों की शिकायत करोगे तो यही जवाब मिलेगा कि सबको जीने का हक है इस दुनिया में,वो भी तो ईश्वर के भेजे हुए प्राणी है और यदि सड़कों पर घूम भी रहे है तो आपका क्या ले रहे हैं जनता को इन आवारा कुत्तों के साथ जीना सीख लेना चाहिएl

मच्छरों से संबंधित शिकायत करोगे तो यही जवाब मिलेगा कि जब आप ‘रक्त दान” करते हैं तो अखबारों में फोटो छपवाते हो यदि मच्छर ने चार छह बूँद खून चूस भी लिया तो आपको ऐतराज होने लगता है, अरे ‘रक्तदान’ तो ‘महादान’ माना जाता है इसलियें मच्छरों को ख़त्म करने की बात मत करो और रोज अपना खून चुसवाते रहो और हमारा तो कहना ये हैं कि इसकी आदत ही डाल लोl वैसे अब इंसानो को अपने आप पर शर्म आ जाना चाहिए कि जब इस कलियुग में इंसान को इंसान पर धेले भर का भरोसा नहीं रह गया है तब अपने वन विभाग वाले तेंदुए और उसकी फेमिली के वचन पर पूरा भरोसा कर रहे हैं कि वो कभी भी इंसान पर हमला नहीं करेगी,इससे जयाद बुरे दिन अब इंसानो के और क्या हो सकते हैं l

वो तो शुक्र मनाओ नयागांव वालो कि तेन्दुए की जगह किसी ‘शेर’ की फेमिली ने वहां अपना डेरा नहीं जमाया वरना ये वन विभाग वाले तो उससे भी आपको सामंजस्य बनाने की बात कह देते और शेर से भी एक ‘एडिडेविट’ लेकर उसके आधार पर अपना हलफनामा कोर्ट में पेश कर देतेl नयागांव वालों को तो अपनी एक सलाह है कि वन विभाग के जिन अफसरों ने ये हलफनामा दिया है उनको कुछ दिन के लिए उसी इलाके में छोड़ दो जंहा तेंदुआ अपनी फेमिली के साथ डेरा डाले हुए है देखते है वे तेंदुए के साथ गलबहियां डाल कर कब तक उसके साथ सामन्जस्य बिठा कर रखते हैं यदि किसी दिन वे किसी ठेले पर तेंदुए के साथ पान, गुटका खाते मिल जाए तो समझ लेना कि ये तेंदुआ सचमुच सामंजस्य रखने लायक है और अपनी याचिका वापस ले लेना क्योकि ऐसे धार्मिक और इंसानों से बेहद मोहब्बत रखने वाले तेंदुए और उसकी फेमिली को पिंजरे में कैद करना बहु बड़ा पाप साबित होगा

चैतन्य भट्ट