ड्रोन की नई गाईड लाईन में प्रदेशों के सरोकार का ध्यान रखे केंद्र: अभय दुबे

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भोपाल: मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे ने बताया कि आज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ ने छत्तीसगढ़ में आयोजित नक्सल प्रभावित राज्यों की इंटर स्टेट काउंसिल की बैठक में बतौर मुख्यमंत्री अपनी पहली भागीदारी सुनिश्चित की। इस बैठक की अध्यक्षता देश के गृह मंत्री अमित शाह कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ की स्पष्ट मान्यता है कि संघीय ढाँचे में सतत संवाद जरूरी है। इस दृष्टिकोण से इन बैठकों का अपना महत्व होता है, मगर केंद्र को चाहिए कि ऐसी बैठकों में निकलने वाले निष्कर्षो पर गंभीरता से राज्यों की मदद करंे, तब ऐसी बैठकें और अधिक सार्थक सिद्ध होंगी।

नक्सली समस्याओं के संदर्भ में एक लंबे अरसे से केंद्र के साथ समन्वय स्थापित करके मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र एक साझा रणनीति के साथ काम कर रहे हैं। वैसे अपेक्षाकृत छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में नक्सली समस्या अधिक है, मगर मध्यप्रदेश के छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से लगे सीमावर्ती जिलों बालाघाट और मंडला में नक्सली मूवमेंट पाया जाता है मगर हाल के वर्षों में नक्सली हमले की कोई बड़ी वारदात मध्यप्रदेश में नहीं घटित हुई है।

मुख्यमंत्री कमल नाथ की मान्यता है कि मध्यप्रदेश की कुछ बुनियादी अपेक्षाएं हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में ड्रोन को लेकर गाइडलाइन जारी की है, मगर उसमें राज्यों के सरोकारों को शामिल नहीं किया गया है। जैसे लाॅ एंड आॅर्डर स्टेट सब्जेक्ट है, अर्थात काफी हद तक नक्सली समस्या से राज्यों को निपटना पड़ता है। ड्रोन जैसे आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल में राज्यों को अधिक स्वायत्तता दी जानी चाहिए। एक और महत्वपूर्ण विषय रेखांकित करने वाला यह हैं कि मध्यप्रदेश प्रदेश काउंटर टेरेरिज्म और काउंटर इंसर्जेनसी का एक बड़ा ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करना चाहता है, जिसमें केंद्र सरकार की मदद अपेक्षित है। भारत सरकार ने पुलिस माॅडर्नाइजेशन के लिए सन 2000 से राज्यों को केंद्रीय अनुदान देना प्रारंभ किया था, जिसे बढ़ाने की अपेक्षा कम कर दिया गया है। अब तो लगभग आधा कर दिया गया है जिससे राज्यों को पुलिस के आधुनिकीकरण में परेशानियाँ आ रही हैं। केंद्र सरकार को चाहिए कि वह मध्यप्रदेश की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का तुरंत संज्ञान लें।

दुबे ने बताया कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की मान्यता है कि नक्सलियों को हिंसा छोड़कर प्रजातांत्रिक तरीके से अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए, साथ ही नक्सली प्रभावित क्षेत्रों में तीव्रता से विकास को पहुंचाना होगा। हर हाल में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के समुचित अवसर इन क्षेत्रों में उपलब्ध कराने होंगे। ये क्षेत्र समृद्ध होंगे तो नक्सली समस्या से स्वयमेव मुक्त हो जाएंगे.