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आर्थिक पैकेज से भी नहीं उभरेगी अर्थव्यवस्था, रिपोर्ट में दर्ज हुई 5 फीसदी गिरावट

नई दिल्ली। देशभर में कोरोना वायरस अब 1 लाख मरीजों के आंकडे को भी पार चुका है। हालांकि देश में कोरोना मामलों के सामने आने के बाद ही लाॅकडाउन लागू कर दिया था ऐसे में लाॅकडाउन के कारण ठप पड़े बाजार के कारण अर्थव्यवस्था भी गड़बड़ा गई है। कई जानकारों का मानना है कि सरकार के आर्थिक पैकेज जारी करने के बाद भी अर्थव्यवस्था को नहीं बचाया जा सकता।

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस कि और से बताया गया है कि सरकार द्वारा हाल में घोषित 20 लाख रुपये के आर्थिक पैकेज से वित्तीय संस्थानों के लिए परिसंपत्तियों के जोखिम में कमी आएगी, लेकिन कोरोना वायरस के कारण अर्थव्यवस्था पर आए नकारात्मक असर को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाएंगे। मूडीज के अनुसार सरकार के उपायों से वित्तीय क्षेत्र के लिए परिसंपत्तियों के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी, लेकिन वे कोरोना वायरस महामारी के नकारात्मक प्रभावों को पूरी तरह दूर नहीं कर पाएंगे।

अमेरिकी कंपनी ने भी माना…

वहीं अमेरिका की ब्रोकरेज कंपनी गोल्डमैन साक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आर्थिक मोर्चे पर भारत का प्रदर्शन एक वर्ष का सबसे खराब होगा। रिपोर्ट के मुताबिक पहली तिमाही अप्रैल-जून में पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही जनवरी- मार्च तिमाही के मुकाबले भारत की जीडीपी में 45 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की जा सकती है।

5 प्रतिशत तक आ सकती है गिरावट 

गोल्डमैन साक्स ने इससे पहले 0.4 प्रतिशत गिरावट आने का अनुमान लगाया था जिसे अब बढ़ा कर 5 प्रतिशत कर दिया है। बता दें कि 25 मार्च से लगे लाॅकडाउन को एक बाद फिर 30 मई तक के लिए बढ़ दिया है। जिसके कारण बाजार पूरी तरह बंद थे लेकिन लाॅकडाउन के तीसरे और चौथे चरण में सरकार ने कई प्रकार की ढील दी है जिसमें कई आर्थिक गतिविधियों को भी छूट दी गई है जिससे अर्थव्यवस्था में सुधार की आशंका जताई जा रही है।