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15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाई जाएगी बिरसा मुंडा की जयंती

जनजाति विकास मंच "जनजाति संगम" कार्यक्रम की जानकारी देते हुए जनजाति विकास मंच इंदौर के अध्यक्ष गोविंद औ भूरिया, संयोजक विक्रम मस्कुले, सह संयोजक राधेश्याम जामले ने बताया कि सम्पूर्ण राष्ट्र इस समय स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अमृत महोत्सव मना रहा है...

जनजाति विकास मंच “जनजाति संगम” कार्यक्रम की जानकारी देते हुए जनजाति विकास मंच इंदौर के अध्यक्ष गोविंद औ भूरिया, संयोजक विक्रम मस्कुले, सह संयोजक राधेश्याम जामले ने बताया कि सम्पूर्ण राष्ट्र इस समय स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अमृत महोत्सव मना रहा है, देश के हर हिस्से में स्वत्रंतता संग्राम के महानायकों के योगदान की स्मृतियों को पुनः स्मरण किया जा रहा है। इसी कड़ी में भारत सरकार द्वारा निर्णय लिया गया की इस वर्ष सम्पूर्ण राष्ट्र 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाएगा।

यह उत्सव दौर जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति को समर्पित होगा ताकि आने वाली पोड़िया देश के प्रति उनके बलिदानों के बारे में जान सकें। आपको बता दे, भारत के स्वतंत्रता संग्राम में हमारे अनजातीय समाज का उल्लेखनीय योगदान रहा है. आगामी 15 से 22 नवंबर तक आजादी के अमृत महोत्सव के तहत पूरे देश में जनजातीय महोत्सव मनाया जाएगा, जिसके तहत जनजातीय समुदाय के स्वतंत्रता सेनानियों के कृतित्व, उनकी कला और संस्कृति पर कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसी कड़ी में जनजाति विकास मंच इंदौर द्वारा जनजाति संगम का आयोजन 14 नवंबर को दोपहर 12:30 बजे विमनबाग में आयोजित किया जाएगा। जिसमें बड़ी संख्या में राष्ट्रभक्त शामिल होंगे।

उल्लेखनीय है कि भगवान बिरसा मुंडा देश के इतिहास में ऐसे नायक थे जिन्होंने जनजाति समाज की दिशा और दशा बदल कर रहेर रख दी थी। उन्होंने हमारे पनवासी बन्धुवों को प्रेजी हुकूमत से मुक्त होकर सम्मान से जीने के लिए प्रेरित किया था। भगवान दिरसा अंग्रेजों के खिलाफ उलगुलान आंदोलन के लोकनायक थे, उनका जन्म 15 नवम्बर 1875 में झारखंड के सूटी में हुआ था। अपने एक और स्वराज के लिए अंग्रेजों से लड़ते हुए वह महज 25 साल की उम्र में शहीद हो गये थे। ऐसे स्वतंत्रता के महानायक को आज भी सम्पूर्ण समाज भगवान के तौर पर पूजता है। इस अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा, महारानी दुर्गावती, महानायिका सिनगी दई, टया मामा भौल, सिद्ध कान्हू, तिलका मांझी जैसे अनजातीय महानायकों को श्रद्धा सुमन अर्पित की जाएगी।

जिन्होंने राष्ट्र की अस्मिता के लिए अपना सर्वस्व त्याग कर हर कठिनाई का सामना करना स्वीकार किया। उनके साहस और पराक्रम से आने वाली पीढ़ियों भी प्रेरणा प्राप्त करती रहेगी। 10-11 बजे अपने-अपने समूह में एकत्रित होंगे 12:00 बजे चिमन दाग मैदान पर पहुंचेंगे जहां पर प्रसिद्ध गायक आनंदीलाल भावेल (हम काळा बाबा ना पोरिया के फेम) अपनी प्रस्तुति देंगे 100 बजे मंच से उद्बोधन शुरू होगा जिसमें जनजाति विषयों पर विभिनयक्ता अपना मंतव्य रखेंगे। अनीता मस्कुले (शिक्षिका), मदन जी वास्केल (प्रोफेसर), अजमेर सिंह जी भायर (बीज प्रमाणिक अधिकारी) कैलास जी अमलियार (प्रचारक राष्ट्रीय शिक्षक संघ), संचालन पूजा ताल जी निनामा व रेखा जी नागर (प्रोफेसर) करमा नृत्य, भगोरिया नृत्य, गोंडी नृत्य प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

विक्रम मस्कुले 07489335040 संयोजक, जनजाति विकास मंच

 

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