पड़ोसी देश बांग्लादेश ने विदेश व्यापार में भारत को पीछे छोड़ दिया है | Business News: Neighboring Country Bangladesh has left India behind in Foreign Trade…

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मिनी चक्रवर्ती की कलम से

विगत महीने 11-13 अप्रैल 2019 तक प्राकृतिक उत्पाद, जैविक और हेल्दी लाइफ स्टाइल क्षेत्र का ढाका में हमारा कार्यक्रम संपन्न हुआ था। जिसमे दोनों देशो के कई एक्सपोर्टर ने हिस्सा लिया था। ये इस क्षेत्र का बांग्लादेश का एकमात्र कार्यक्रम था जिसे वहा के इंडियन हाई कमिश्नर द्वारा सपोर्ट दिया गया था. इस एक्सपो का उद्देश्य दोनों देशो के बीच व्यापार बढाने के साथ साथ नेचुरल प्रोडक्ट का मार्किट भी डेवलप करना है।

मैं कार्यक्रम की संयोजक थी, मैं बताना चाहती हूं कि मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर में बांग्लादेश तेज़ी से प्रगति कर रहा है। कपड़ा उद्योग में बांग्लादेश चीन के बाद दूसरे नंबर पर है। हाल के एक दशक में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था औसत 6 फ़ीसदी की वार्षिक दर से आगे बढ़ी है। साल 2018 जून महीने में यह वृद्धि दर 7.86 फ़ीसदी तक पहुंच गई थी।

बांग्लादेश की वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर पाकिस्तान से 2.5 फ़ीसदी आगे निकल गई। मैं रेगुलर बांग्लादेश जा रही हु और मेरा ये मानना है कि बांग्लादेश विकास दर में भारत को भी पीछे छोड़ सकता है।

बांग्लादेश की आबादी 1.1 फ़ीसदी दर से प्रति वर्ष बढ़ रही है जबकि पाकिस्तान की दो फ़ीसदी की दर से बढ़ रही है। इसका मतलब यह भी है कि पाकिस्तान की तुलना में बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति आय भी तेज़ी से बढ़ रही है। ये देखने में आ रहा ही कि बांग्लादेश बड़े शांत तरीक़े से अपना कायापलट कर रहा है। मैंने यहाँ देखा कि बांग्लादेश के समाज के बड़े हिस्से में बदलाव की बयार है और यहां महिलाओं का सशक्तीकरण भी तेज़ी से हो रहा है। बांग्लादेश में एक व्यक्ति की औसत उम्र 72 साल हो गई है जो कि भारत के 68 साल और पाकिस्तान के 66 साल से ज़्यादा है।

विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 2017 में बांग्लादेश में जिन लोगों का बैंक खाता है। उनमें से 34.1 फ़ीसदी लोगों ने डिजीटल लेन-देन किया जो दक्षिण एशिया में औसत 27.8 फ़ीसदी ही है। भारत में ऐसे लोगों की तादाद 48 फ़ीसदी है जिनके पास बैंक खाता तो है लेकिन उससे कोई लेन-देन नहीं करते। ऐसे खातों को डॉर्मन्ट अकाउंट (निष्क्रिय खाता) कहा जाता है। दूसरी तरफ़ बांग्लादेश में ऐसे लोग 10.4 फ़ीसदी लोग ही हैं।

इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश के लिए वो पल काफ़ी निर्णायक रहा जब संयुक्त राष्ट्र ने बांग्लादेश को अल्पविकसित देश की श्रेणी से निकाल 2024 में विकासशील देशों की पंक्ति में खड़ा करने की बात कही।

संयुक्त राष्ट्र की इस पहल पर शेख हसीना ने एक इंटरव्यू में कहा था, ”अल्पविकसित श्रेणी से बाहर निकलना हमारे आत्मविश्वास और उम्मीदों की मज़बूती के लिए बहुत ख़ास है। यह न केवल नेताओं के लिए बल्कि यहां के नागरिकों के लिए भी अच्छा है। अगर आप निचले दर्जे में रहते हैं तो प्रोजेक्ट और प्रोग्राम पर बातचीत भी उन्हीं की शर्तों के हिसाब से होती है। ऐसे में आप दूसरों की दया पर ज़्यादा निर्भर करते हैं। एक बार जब आप उस श्रेणी से बाहर निकल जाते हैं तो किसी दया की नहीं बल्कि अपनी क्षमता के दम पर आगे बढ़ते हैं।”

हसीना मानती हैं कि बांग्लादेश की मज़बूत वृद्धि दर न केवल जारी रहेगी बल्कि इसमें तेज़ी भी आएगी. एशियन निक्केई रिव्यू को दिए इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा है, ”अगले पाँच सालों में हमलोग उम्मीद करते हैं कि वृद्धि दर 9 फ़ीसदी रहेगी और 2021 में 10 फ़ीसदी तक जाएगी। मैं हमेशा ऊंची दर का अनुमान लगाती हूं।”

बांग्लादेश अभी मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है। कपड़ा उद्योग में बांग्लादेश का प्रभुत्व दुनिया भर में जाना जाता है। में यहाँ के कई कपड़ा व्यापारियों से मिली। बांग्लादेश में बनने वाले कपड़ों का निर्यात सालाना 15 से 17 फ़ीसदी की दर से आगे बढ़ रहा है। 2018 में जून महीने तक कपड़ों का निर्यात 36.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हसीना का लक्ष्य है कि 2019 तक इसे 39 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए और 2021 में बांग्लादेश जब अपनी 50वीं वर्षगांठ मनाए तो यह आंकड़ा 50 अरब डॉलर तक पहुंच जाए।

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में विदेशों में काम करने वाले क़रीब 25 लाख बांग्लादेशियों की भी बड़ी भूमिका है। विदेशों से जो ये पैसे कमाकर भेजते हैं उनमें सालाना 18 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हो रही है और 2018 में 15 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि हसीना जानती हैं कि देश में टिकाऊ अर्थव्यवस्था के लिए उद्योग-धंधों को बढ़ाना होगा। बांग्लादेश कम लागत वाले मैन्युफ़ैक्चरिंग हब से आगे निकलना चाहता है जो बाहरी धन और विदेशी मदद पर निर्भर है।

2009 में शेख हसीना ने डिजिटल बांग्लादेश लॉन्च किया था ताकि टेक्नॉलजी को बढ़ावा दिया जा सके। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में टेक्नॉलजी सेक्टर भी पांव पसार रहा है। ढाका के सीईओ भारत के आईटी सेक्टर से सीख उसे टक्कर देना चाहते हैं। बांग्लादेश की सरकार देश भर में 100 विशेष आर्थिक क्षेत्रों का नेटवर्क तैयार करना चाहती है। इनमें से 11 बनकर तैयार हो गए हैं और 79 पर काम चल रहे हैं।

बांग्लादेश छोटा सा देश है पर पर इसकी आबादी बहुत ज़्यादा है. यहां की आबादी बहुत ही सघन है।. बांग्लादेश बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री फ़ैसल अहमद बड़ी आबादी को अपने मुल्क की तरक्की में काफ़ी लाभकारी मानते हैं।. फ़ैसल ने अपने कई इंटरव्यू में कहा है कि सघन आबादी के कारण सोशल और इकनॉमिक आइडिया को ज़मीन पर उतारने में काफ़ी मदद मिलेगी।

बांग्लादेश में आर्थिक मोर्चे पर सब कुछ बढ़िया से चलने का ये मतलब ये क़तई नहीं है कि यहां चुनौतियां नहीं हैं। बांग्लादेश में दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बीच तीखी प्रतिद्वंद्विता है। बांग्लादेश की सियासत में दो महिलाओं शेख हसीना और पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया का प्रभुत्व रहा है।

जब बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान था तब दोनों ही नेताओं के परिवारों की बांग्लादेश की आज़ादी में अहम भूमिका रही। पिछले तीन दशकों में दोनों महिलाएं सत्ता में आती-जाती रही हैं। इसके साथ ही दोनों जेल में भी रहीं।

बांग्लादेश की सफलता में रेडिमेड कपड़ा उद्योग की सबसे बड़ी भूमिका मानी जाती है। कपड़ा उद्योग बांग्लादेश के लोगों को सबसे ज़्यादा रोज़गार मुहैया कराता है। कपड़ा उद्योग से बांग्लादेश में 40.5 लाख लोगों को रोज़गार मिला हुआ है। 2018 में बांग्लादेश के कुल निर्यात में रेडिमेड कपड़ों का योगदान 80 फ़ीसदी रहा। बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के लिए 2013 में राना प्लाज़ा आपदा किसी बड़े झटके से कम नहीं थी। कपड़ों की फ़ैक्ट्री की यह बहुमंजिला इमारत गिर गई थी और इसमें 1,130 लोग मारे गए थे। इसके बाद कपड़े के अंतर्राष्ट्रीय ब्रैंड कई तरह के सुधारों के लिए मजबूर हुए।

फ़ैक्ट्रियों को अपग्रेड किया गया और इसमें काम करने वाले कामगारों की स्थिति में बेहतरी के लिए कई क़दम उठाए गए। बांग्लादेश में कपड़ों की सिलाई का काम व्यापक पैमाने पर होता है और इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। 2013 के बाद से अब ऑटोमेटेड मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है। अमरीका और चीन के बीच छिड़े ट्रेड वॉर में बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को काफ़ी उम्मीद है। बांग्लादेश को लगता है कि अगर चीन का कपड़ा निर्यात कम हुआ तो वो इसकी भरपाई की क्षमता रखता है। हालांकि इसका फ़ायदा वियतनाम, तुर्की, म्यांमार और इथोपिया को भी मिलने की बात कही जा रही है।

टेक्सटाइल इंडस्ट्री में बांग्लादेश को दुनिया के कई देशों से कड़ी टक्कर मिल रही है। बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफ़ैक्चरर्स एंड एक्पोर्टर्स असोसिएशन के अनुसार पिछले पांच सालों में चार हज़ार 560 कपड़े की फ़ैक्ट्रियों में से 22 फ़ीसदी कम हुए हैं। मार्केट रिसर्च कंपनी सीएलएसए के स्ट्रैटिजिस्ट क्रिस्टोफर वुड्स ने अपने एक इंटरव्यू में कहा है कि बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए भविष्य में कई अड़चने भी हैं।

वुड्स ने कहा है, ”बांग्लादेश की इस इंडस्ट्री में काम करने वालों को बहुत कम पैसे मिलते हैं। अगर बांग्लादेश को 2024 में संयुक्त राष्ट्र अल्प विकसित देश के दर्जे को विकासशील देश में तब्दील कर देता है तो टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए यह देश उत्पाद शुल्क मुक्त बाज़ार नहीं रह जाएगा। बांग्लादेश के सामने दूसरी चुनौती यह है कि यहां दूसरे सेक्टर प्रभावी रूप से विकसित नहीं हो रहे हैं। बांग्लादेश में और विदेशी निवेश की ज़रूरत है।’

2018 में चीन ने बांग्लादेश के ढाका स्टॉक एक्सचेंज का 25 फ़ीसदी हिस्सा ख़रीद लिया था। इसे ख़रीदने की कोशिश भारत ने भी की थी कि लेकिन चीन ने इसकी ज़्यादा क़ीमत चुकाई और भारत के हाथ से यह सौदा निकल गया था। बांग्लादेश पाकिस्तान के बाद चीन से सैन्य हथियार ख़रीदने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। शेख हसीना भी इस बात को मानती हैं कि चीन इस इलाक़े में बड़ी भूमिका निभा रहा है। बांग्लादेश कई मोर्चों पर न केवल पाकिस्तान से आगे निकल चुका है बल्कि भारत को भी पीछे छोड़ रहा है। बाल मृत्यु दर, लैंगिक समानता और औसत उम्र के मामले में बांग्लादेश भारत को पीछे छोड़ चुका है।

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार 2013 में बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय 914 डॉलर थी जो 2016 में 39.11 फ़ीसदी बढ़कर 1,355 डॉलर हो गई। इसी अवधि में भारत में प्रति व्यक्ति आय 13.80 फ़ीसदी बढ़ी और 1,706 डॉलर तक पहुंची। पाकिस्तान में इसी अवधि में 20.62 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई और 1,462 डॉलर पर पहुंच गई। कहा जा रहा है कि अगर बांग्लादेश इसी गति से प्रगति करता रहा तो 2020 में भारत को प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी पीछे छोड़ देगा।

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