CAB पर भारत का जवाब, अमेरिका के दखल की कोई जरूरत नहीं

0
45

नई दिल्ली। भारत की लोकसभा में पास हुए नागरिकता संशोधन विधेयक पर अमेरिका द्वारा उठाए गए सवालों का भारत ने जवाब दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि इस विधेयक पर अमेरिकी आयोग का बयान न तो सही है और न ही इसकी आवश्यकता थी। मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक और एनआरसी किसी भी धर्म के भारतीय नागरिक से उसकी नागरिकता नहीं छीनता है। अमेरिका समेत तामाम देशों को अपनी नीतियों के तहत नागरिकता से जुड़े मुद्दे पर फैसला लेने का अधिकार है।

रवीश कुमार ने कहा, ‘अमेरिकी आयोग की ओर से जिस तरह का बयान दिया गया है, वह हैरान नहीं करता है, क्योंकि उनका रिकॉर्ड ही ऐसा है। हालांकि, ये भी निंदनीय है कि संगठन ने जमीनी स्तर पर कम जानकारी होने के बाद भी इस तरह का बयान दिया है। यह संशोधन विधेयक उन धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देता है, जो पहले से ही भारत में आए हुए हैं। भारत ने यह फैसला मानवाधिकार को देखते हुए लिया है। इस प्रकार के फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए न कि उसका विरोध होना चाहिए।‘

गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने इस बिल को खतरनाक कदम बताया है। हालांकि, इस पर अमेरिकी सरकार से कोई बयान नहीं आया है।

आमेरिका धार्मिक स्वतंत्रता केंद्रीय आयोग ने नागरिकता संशोधन बिल को लेकर मांग की है कि यदि दोनों सदनों में बिल पास होता है तो गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अमेरिका से प्रतिबंध लगाया जाए। आयोग ने आरोप लगाया है कि बिल मुस्लिमों को छोड़कर बाकी प्रवासियों के लिए नागरिकता पाने का रास्ता खोलता है यानी नागरिकता के कानूनी दायरे का आधार धर्म को बना दिया गया है।

आयोग ने कहा कि यह गलत दिशा में खतरनाक कदम है, इसमे धर्म को आधार बनाए बिना कानून के सामने सभी को समानता के अधिकार की गारंटी दी गई है। आयोग ने एनआरसी पर भी टिप्पणी की और कहा कि आयोग को डर है कि भारत सरकार भारतीय नागरिकता के लिए एक रिलीजन टेस्ट करा रही है जो लाखों मुस्लिमों से उनकी नागरिकता छीन सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here