इंदौर के प्रतिष्ठित Medicaps School में कक्षा 3 के दो छात्रों के साथ हुई गंभीर दुर्घटना के बाद स्कूल प्रबंधन का रवैया सवालों के घेरे में आ गया है। स्कूल परिसर के अंदर दो छात्रों की आमने-सामने हुई जोरदार टक्कर में दोनों बच्चों के सिर में गंभीर चोट आई और दोनों को टांके लगाने पड़े।
पीड़ित छात्र के अभिभावक ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने इलाज की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया और पूरे मामले में बेहद असंवेदनशील व्यवहार किया।
पीड़ित अभिभावक के अनुसार, उनका पुत्र त्रिजल हेतावल, जो मेडिकैप्स स्कूल की कक्षा 3-F का छात्र है, बुधवार दोपहर करीब 1 बजे लंच के बाद वॉशरूम की ओर जा रहा था। उसी दौरान दूसरी दिशा से कक्षा 3-C का छात्र दिव्यांश तेज गति से दौड़ते हुए आया। दोनों बच्चों की आमने-सामने इतनी जोरदार टक्कर हुई कि दोनों के सिर में गंभीर चोट लग गई। हादसे के तुरंत बाद दोनों बच्चों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने दोनों के सिर में टांके लगाए।
सहमति के बिना ले गए चोइथराम अस्पताल
अभिभावक का आरोप है कि दुर्घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने दोनों बच्चों को दो महिला शिक्षिकाओं के साथ सीधे चोइथराम अस्पताल भेज दिया। उन्होंने कई बार आग्रह किया कि उनके बच्चे को उस अस्पताल में ले जाया जाए, जहां उनके फैमिली डॉक्टर उपलब्ध हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। स्कूल की ओर से बताया गया कि संस्थान का चोइथराम अस्पताल से टाई-अप होने के कारण वहीं इलाज कराया जाएगा।
‘बच्चा आपका है, इलाज आप कराइए’
पीड़ित पिता का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद उनकी बातचीत स्कूल की प्रतिनिधि श्रीमती कोमल अग्रवाल से हुई। अभिभावक का दावा है कि उन्हें स्पष्ट रूप से कहा गया कि “बच्चा आपका है, इलाज आप कराइए, इसकी कोई जिम्मेदारी स्कूल की नहीं है।” इस कथित बयान के बाद परिजनों ने स्कूल प्रबंधन के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
OPD फीस के लिए भी करना पड़ा इंतजार
अभिभावक ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे में घायल दूसरे छात्र दिव्यांश के परिजन तत्काल अस्पताल नहीं पहुंच पाए थे, क्योंकि उसके पिता पहले से अस्पताल में भर्ती थे। ऐसे में उसकी ₹900 की ओपीडी फीस जमा कराने के लिए भी काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
पीड़ित अभिभावक का कहना है कि उन्होंने स्वयं फीस जमा कराने की पेशकश की, लेकिन साथ मौजूद शिक्षिकाओं ने यह कहते हुए मना कर दिया कि प्रबंधन की अनुमति के बिना भुगतान नहीं किया जा सकता। करीब एक घंटे बाद प्रबंधन से अनुमति मिलने पर फीस जमा कराई गई।
11 घंटे अस्पताल में भर्ती रहा बच्चा
परिजनों के अनुसार, त्रिजल को दोपहर करीब 1:30 बजे अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उपचार के बाद रात करीब 12:30 बजे उसे छुट्टी मिली। इस दौरान परिवार लगातार अस्पताल में मौजूद रहा।
‘किसी ने हालचाल तक नहीं पूछा’
पीड़ित परिवार का आरोप है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान स्कूल प्रबंधन की ओर से किसी वरिष्ठ अधिकारी ने न तो बच्चे का हालचाल जानने के लिए फोन किया और न ही परिवार से किसी प्रकार की संवेदना व्यक्त की। उनका कहना है कि उन्हें स्वयं स्कूल की प्रतिनिधि कोमल अग्रवाल और बाद में वाइस चेयरमैन गोपाल अग्रवाल से संपर्क करना पड़ा।
अभिभावक का दावा है कि जब उन्होंने वाइस चेयरमैन से पूछा कि स्कूल परिसर में हुई इस दुर्घटना और घायल बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी क्या स्कूल की नहीं बनती, तो उन्हें जवाब मिला कि “इसकी कोई जिम्मेदारी हमारी नहीं है।”
स्कूल की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
घटना के बाद पीड़ित परिवार ने बच्चे की चोटों के फोटो और वीडियो साझा करते हुए अन्य अभिभावकों से इस मामले पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि स्कूल परिसर के भीतर हुई गंभीर दुर्घटना के बाद भी स्कूल प्रबंधन स्वयं को जिम्मेदार नहीं मानता, तो यह सभी अभिभावकों के लिए चिंता का विषय है।
यह घटना स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और दुर्घटना की स्थिति में प्रबंधन की जिम्मेदारी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।










