इंदौर में भावुक हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बंधाया ढांढस, देखें वीडियो

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By Raj RathorePublished On: June 20, 2026
Manohar Lal Khattar in Indore

इंदौर के पितृ पर्वत पर शनिवार को एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जब केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर अपने दिवंगत माता-पिता की स्मृति में पौधारोपण करने पहुंचे। माता-पिता की तस्वीर देखते ही वे भावुक हो गए और उनकी आंखें नम हो गईं। कुछ देर तक वे अपने जज्बातों को संभाल नहीं पाए।

दरअसल, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजना के भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होने इंदौर आए थे। कार्यक्रम से पहले वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ पितृ पर्वत पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी माता शांति देवी खट्टर और पिता हरबंस लाल खट्टर की स्मृति में त्रिवेणी का पौधा लगाया।

माता-पिता की तस्वीर देखकर भर आईं आंखें

पौधारोपण कार्यक्रम से पहले नगर निगम के उद्यान प्रभारी राजेंद्र राठौड़ द्वारा उनके माता-पिता की तस्वीरें वहां लगाई गई थीं। जैसे ही मनोहर लाल खट्टर ने तस्वीरों पर नजर डाली, वे भावुक हो उठे। अपने माता-पिता को याद करते हुए उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

 

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मौके पर मौजूद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें सांत्वना दी। मुख्यमंत्री ने स्वयं उनके साथ पौधारोपण कर इस भावुक क्षण में उनका साथ निभाया।

30 पेड़ लगाने चाहिए

पौधारोपण के बाद मनोहर लाल खट्टर ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में जितनी कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण में छोड़ता है, उसे संतुलित करने के लिए लगभग 30 पेड़ों की आवश्यकता होती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम 30 पेड़ अवश्य लगाने चाहिए।

स्मृतियों का अनोखा केंद्र

इंदौर का पितृ पर्वत आज हजारों परिवारों की भावनाओं और स्मृतियों का केंद्र बन चुका है। यहां लोग अपने दिवंगत परिजनों की याद में पौधे लगाते हैं, जो समय के साथ एक जीवंत स्मारक का रूप ले लेते हैं।

पितृ पर्वत पर स्थापित अष्टधातु की विशाल हनुमान प्रतिमा और हरियाली से आच्छादित परिसर इसे इंदौर के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों में शामिल करता है। प्रतिदिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।