गुरूवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इंदौर दौरे के दौरान एक भावुक और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया। विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम के बीच एक महिला रोते हुए मुख्यमंत्री के पास पहुंच गई और मेट्रो परियोजना के लिए अधिग्रहित किए जा रहे अपने मकान के बदले कम मुआवजा मिलने की शिकायत करने लगी।
महिला की बात सुनकर कुछ देर के लिए कार्यक्रम स्थल पर असमंजस की स्थिति बन गई। महिला लगातार मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाती रही और अधिकारियों पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए बोली कि अन्य लोगों को 40-40 लाख रुपये तक मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि उसे केवल 16 लाख रुपये की राशि दी जा रही है।
‘मेरी तीन बेटियां हैं, बेटा कहां से लाऊं?’
इंदौर के पीलिया खाल क्षेत्र की रहने वाली महिला ने मुख्यमंत्री के सामने भावुक होते हुए कहा कि अधिकारियों ने उससे कहा कि अगर उसका बेटा होता तो उसे ज्यादा मुआवजा मिलता।
महिला ने रोते हुए कहा, “मेरी तीन बेटियां हैं, बेटा कहां से लाऊं? क्या बेटियां होने की वजह से मेरा हक कम हो जाएगा? हमने दूसरों के घरों में बर्तन मांजकर अपना घर बनाया है।”
महिला की यह बात सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी भावुक हो गए।
11 लाख से बढ़ाकर 16 लाख किया
मुख्यमंत्री ने तुरंत इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा को बुलाकर पूरे मामले की जानकारी ली। कलेक्टर ने बताया कि संबंधित संपत्ति के लिए पहले 11 लाख रुपये का मुआवजा तय हुआ था, जिसे बढ़ाकर 16 लाख रुपये कर दिया गया है।
हालांकि महिला इससे संतुष्ट नहीं थी और लगातार 40 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की मांग करती रही।
मुख्यमंत्री बोले- और बढ़ा दो
महिला की शिकायत सुनने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि मामले को दोबारा देखें और मुआवजे की राशि बढ़ाने पर विचार करें।इसके बावजूद महिला का कहना था कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते हैं और केवल मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
महिला मुख्यमंत्री से बार-बार आग्रह करती रही कि वे उसके आवेदन पर लिखित आदेश दें। वह लगातार रोते हुए कहती रही साहब, आप लिखकर दे दो, नहीं तो कोई नहीं सुनेगा। महिला की जिद और उसकी स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपनी जेब से कलम निकाली और उसके आवेदन पर कुछ लिखकर कलेक्टर को सौंप दिया।
हालांकि आवेदन पर मुख्यमंत्री ने क्या निर्देश लिखे, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
मुआवजे को लेकर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार बड़ा गणपति क्षेत्र में प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन निर्माण के लिए करीब 10 मकानों का अधिग्रहण किया गया है। इनमें से 9 मामलों का निपटारा हो चुका है, लेकिन एक मकान के मुआवजे को लेकर विवाद बना हुआ था।
महिला की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद अब मेट्रो परियोजना में मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया और उसमें समानता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।










