उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिशन रोजगार के तहत यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा चयनित 930 कंप्यूटर ऑपरेटर (ग्रेड-ए) अभ्यर्थियों को लोकभवन में नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस अवसर पर उन्होंने नवचयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए भर्ती बोर्ड की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी नवचयनित अभ्यर्थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में आत्म-अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण गुण है और प्रत्येक कर्मचारी को अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी गंभीरता और सजगता रखनी चाहिए।
ड्यूटी के दौरान रील बनाने पर सख्त संदेश
सीएम योगी ने कहा कि ड्यूटी के दौरान रील बनाना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। उन्होंने नवचयनित कर्मियों को सलाह दी कि ऐसा कोई कार्य न करें, जिससे पुलिस विभाग की छवि प्रभावित हो या उन्हें सार्वजनिक रूप से आलोचना का सामना करना पड़े।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, सुरक्षा मानकों और टीम भावना के साथ कार्य करते हुए सभी चयनित अभ्यर्थी यूपी पुलिस को और अधिक मजबूत बनाएंगे।
यूपी पुलिस बनी मॉडल पुलिसिंग की मिसाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी पुलिस ने पिछले नौ वर्षों में जनसेवा को केंद्र में रखकर काम किया है, जिसके कारण उसकी पहचान देशभर में मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि आज यूपी पुलिस केवल संख्या बल के कारण नहीं, बल्कि अपने कार्यों और परिणामों के कारण मॉडल पुलिसिंग का उदाहरण बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन के विजन को धरातल पर उतारने में यूपी पुलिस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आने वाले समय में नवचयनित कंप्यूटर ऑपरेटर स्मार्ट पुलिसिंग और डिजिटल वॉरियर्स के रूप में बड़ी जिम्मेदारी निभाएंगे।
2017 से पहले के यूपी को याद करने की सलाह
मुख्यमंत्री ने अभ्यर्थियों से कहा कि वे अपने माता-पिता और गुरुजनों से 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की स्थिति के बारे में पूछें। उन्होंने कहा कि उस समय प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण थी और औसतन हर दूसरे-तीसरे दिन दंगे होते थे।
उन्होंने दावा किया कि त्योहारों और उत्सवों से पहले तनाव और उपद्रव की घटनाएं आम थीं तथा कई स्थानों पर लंबे समय तक कर्फ्यू लगा रहता था। जबकि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में कहीं भी कर्फ्यू लगाने की जरूरत नहीं पड़ी और हर नागरिक को सुरक्षा का वातावरण मिला है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने की चर्चा वर्ष 1972 से चल रही थी, लेकिन दशकों तक यह केवल फाइलों में ही सीमित रहा। उनकी सरकार ने सात जिलों में कमिश्नरेट व्यवस्था लागू कर पुलिस सुधारों को नई दिशा दी।
उन्होंने कहा कि कमिश्नरेट सिस्टम पुलिस रिफॉर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है और जो लोग इसकी आलोचना करते हैं, उन्हें पुलिसिंग की आधुनिक जरूरतों की पर्याप्त जानकारी नहीं है।
तकनीक आधारित पुलिसिंग को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी पुलिस तेजी से तकनीक आधारित पुलिसिंग की ओर बढ़ रही है। ऐसे में कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नवचयनित अभ्यर्थी पारदर्शिता, निष्पक्षता और पेशेवर दक्षता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे और प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएंगे।









