मध्यप्रदेश में तीन बच्चे होने की वजह से अफसर हुआ बर्खास्त, तीन दिन पहले सीएम ने कहा था नौकरी नहीं जाएगी

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By Raj RathorePublished On: June 12, 2026
Ashok Singh Parihar

मध्यप्रदेश में तीसरी संतान के आधार पर एक सरकारी अधिकारी की बर्खास्तगी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उस घोषणा के महज 48 घंटे बाद हुई है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा था कि दो से अधिक संतान होने के आधार पर किसी की सरकारी नौकरी नहीं जाएगी।

पंजीयन विभाग के आईजी अमित तोमर ने सिंगरौली में पदस्थ सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है। आदेश गुरुवार को जारी हुआ, जबकि मामला शुक्रवार को सार्वजनिक हुआ।

तीसरी संतान के जन्म पर हुई कार्रवाई

जानकारी के अनुसार अशोक सिंह परिहार के खिलाफ शिकायत की गई थी कि शासकीय सेवा में रहते हुए उनकी तीसरी संतान का जन्म हुआ था। शिकायत के बाद विभाग ने पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया और फिर विभागीय जांच के आदेश दिए।

जांच अधिकारी के रूप में वरिष्ठ जिला पंजीयक जबलपुर पवन अहिरवार को नियुक्त किया गया था। जांच के दौरान जन्म संबंधी दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल की गई।

सही पाए गए आरोप

जांच रिपोर्ट के अनुसार परिहार की तीसरी संतान अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। कलेक्टर सिंगरौली की संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आरोप सही पाए गए।

जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2025 को सौंपी रिपोर्ट में भी परिहार को दोषी माना था, जिसके बाद विभाग ने बर्खास्तगी की कार्रवाई की।

नियम की जानकारी नहीं थी

अपने जवाब में अशोक सिंह परिहार ने कहा था कि उन्हें दो से अधिक संतान संबंधी नियम की जानकारी नहीं थी। उनका तर्क था कि विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई थी।

हालांकि विभाग ने इस दलील को खारिज कर दिया। आदेश में कहा गया कि परिहार वर्ष 1992 से नियमित शासकीय सेवा में थे, इसलिए यह मानना संभव नहीं है कि उन्हें सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी।

CM ने हाल ही में दिया था बड़ा बयान

गौरतलब है कि 9 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के उस प्रस्ताव को निरस्त करने के निर्देश दिए थे, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा के लिए अपात्र घोषित करने की बात कही गई थी।

मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को पोर्टल से हटाने और संशोधित ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद माना जा रहा था कि ऐसे मामलों में कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।

नहीं मिला आदेश

पंजीयन विभाग का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी इस संबंध में कोई नया शासकीय आदेश जारी नहीं हुआ है। इसलिए विभाग ने वर्तमान में लागू नियमों के आधार पर कार्रवाई की है। अधिकारियों के मुताबिक जब तक नियमों में औपचारिक संशोधन नहीं होता, तब तक पुरानी अधिसूचना प्रभावी मानी जाएगी।

10 मार्च 2000 को जारी अधिसूचना के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की दो से अधिक जीवित संतान हैं और उनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है, तो वह शासकीय सेवा के लिए पात्र नहीं माना जाएगा। अशोक सिंह परिहार का मामला इसी प्रावधान के दायरे में आने के कारण कार्रवाई की गई है।

आगे क्या विकल्प?

बर्खास्त किए गए सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार के पास विभागीय अपील का विकल्प मौजूद है। वे शासन स्तर पर इस आदेश को चुनौती दे सकते हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर राहत की मांग कर सकते हैं।