मध्यप्रदेश में 25 मिनट के लिए कलेक्टर बनी चौथी कक्षा की छात्रा, पहले आदेश से आदिवासी गांव में पहली बार पहुंची बिजली

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By Raj RathorePublished On: May 12, 2026
Saraswati Singh Collector Sidhi

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल सीधी जिले के छड़हुला टोला गांव में आखिरकार रोशनी पहुंच गई। वर्षों से अंधेरे में जीवन गुजार रहे गांव के 40 घर अब बिजली से जगमगा उठे हैं। इस बदलाव की सबसे खास बात यह रही कि इसकी शुरुआत किसी बड़े आंदोलन या सरकारी अभियान से नहीं, बल्कि चौथी कक्षा में पढ़ने वाली एक मासूम बच्ची की आवाज से हुई।

दरअसल, 28 अप्रैल को जनपद पंचायत कुसमी के छड़हुला टोला गांव में जनचौपाल आयोजित की गई थी। इस दौरान कलेक्टर विकास मिश्रा ग्रामीणों से संवाद कर रहे थे। तभी उनकी मुलाकात प्राथमिक शाला की छात्रा सरस्वती सिंह से हुई।

“मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं, लेकिन गांव में बिजली नहीं”

कलेक्टर ने बातचीत के दौरान सरस्वती से पढ़ाई के बारे में पूछा। सरस्वती ने आत्मविश्वास के साथ 20 का पहाड़ा सुनाया, जिससे अधिकारी भी प्रभावित हो गए। जब उससे पूछा गया कि बड़ी होकर क्या बनना चाहती हो, तो उसने तुरंत जवाब दिया – “मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं।”

लेकिन इसके बाद उसने गांव की सबसे बड़ी परेशानी भी बता दी। सरस्वती ने कहा कि गांव में बिजली नहीं है, इसलिए रात में पढ़ाई नहीं हो पाती।

25 मिनट की ‘कलेक्टर’

नन्ही बच्ची की बात सुनकर कलेक्टर विकास मिश्रा ने उसे 25 मिनट के लिए प्रतीकात्मक रूप से ‘कलेक्टर’ की कुर्सी पर बैठाया। कुर्सी संभालते ही सरस्वती ने गांव में 15 दिन के भीतर बिजली पहुंचाने का आदेश दिया।

प्रशासन ने भी इस मांग को गंभीरता से लिया और तय समय से पहले ही महज 13 दिनों में गांव के सभी 40 घरों तक बिजली पहुंचा दी।

पहली बार जले बल्ब, गांव में मना उत्सव

जब गांव में पहली बार बिजली पहुंची और बल्ब जले, तो पूरे छड़हुला टोला में उत्सव जैसा माहौल बन गया। ग्रामीणों ने बल्ब के पास स्वस्तिक बनाकर फूल और अक्षत चढ़ाए। सबसे खास पल तब आया, जब सरस्वती ने खुद स्विच ऑन कर गांव को रोशन किया। गांव के लोगों के चेहरे खुशी से खिल उठे।

सड़क की मांग पर भी शुरू हुआ सर्वे

सरस्वती ने केवल बिजली की मांग ही नहीं की, बल्कि गांव में सड़क निर्माण की जरूरत भी अधिकारियों के सामने रखी। इसके बाद प्रशासन ने सड़क निर्माण के लिए सर्वे कार्य भी शुरू कर दिया है।

करीब 207 आबादी वाले इस गांव में अब तक लोग लालटेन, चिमनी और लकड़ी जलाकर रोशनी करते थे। अब बिजली पहुंचने से बच्चों की पढ़ाई आसान होगी और गांव में नई सुविधाओं का रास्ता खुलेगा।