Indore News : देश की सीमा पर तैनात एक सैनिक को अपनी ही पुश्तैनी जमीन बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मामला इंदौर कलेक्टोरेट की जनसुनवाई में सामने आया, जहां राजौरी सेक्टर में पदस्थ सेना के सूबेदार निलेश पंचाल अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा लेकर पहुंचे।
महू तहसील के ग्राम आम्बाचंदन निवासी सूबेदार निलेश पंचाल का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि पर पड़ोसी कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सीमांकन के लिए पिछले तीन वर्षों से दिए जा रहे आवेदन पर राजस्व विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा।
सीमांकन के लिए भटक रहा परिवार
सूबेदार निलेश पंचाल ने बताया कि हर बार आवेदन देने के बाद कोई न कोई तकनीकी कारण बताकर मामला टाल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब भी छुट्टी लेकर गांव आते हैं, पूरा समय पटवारी और तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने में निकल जाता है।
परिवार ने 3 मार्च को सीमांकन के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उसे गलत बताकर प्रक्रिया रोक दी गई। इसके बाद 28 अप्रैल को दोबारा आवेदन किया गया, लेकिन अब तक सीमांकन आदेश जारी नहीं हुए। आरोप है कि पटवारी द्वारा “कैलेंडर के अनुसार ही नपती होगी” कहकर मामला लगातार टाला जा रहा है।
‘देश की रक्षा कर रहा हूं, लेकिन अपनी जमीन नहीं बचा पा रहा’
सूबेदार निलेश पंचाल ने कहा कि वह पिछले 20 वर्षों से सेना में सेवा दे रहे हैं और हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी लगातार ड्यूटी पर तैनात थे। इसके बावजूद जब अपने परिवार की जमीन बचाने की बात आई तो प्रशासन ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई।
उन्होंने बताया कि वह 15 अप्रैल को एक महीने की छुट्टी लेकर गांव आए थे और 15 मई को वापस ड्यूटी पर लौटना है, लेकिन अब तक सीमांकन की प्रक्रिया शुरू तक नहीं हो सकी।
परिवार की कृषि भूमि ग्राम आम्बाचंदन के सर्वे नंबर 752/2 में दर्ज है, जिसका रकबा 1.977 हेक्टेयर बताया गया है। जमीन परिवार के कई सदस्यों के नाम दर्ज है और मौके पर रकबा कम निकलने के कारण सीमांकन की मांग की जा रही है।
राजस्व अभियान पर उठे सवाल
प्रदेश सरकार द्वारा लंबित राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाए जाने के बावजूद इस मामले ने प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीमांकन, बटांकन और नक्शा सुधार जैसे मामलों में लोगों को महीनों नहीं, बल्कि वर्षों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
मामला जनसुनवाई में पहुंचने के बाद राजस्व विभाग अब नक्शा सुधार की प्रक्रिया का हवाला दे रहा है। तहसीलदार यशदीप राव का कहना है कि पहले नक्शा सुधार होगा, उसके बाद सीमांकन किया जाएगा।
हालांकि परिवार का सवाल है कि यदि नक्शा सुधार जरूरी था तो तीन साल पहले ही इसकी प्रक्रिया क्यों नहीं शुरू की गई। अब सैनिक परिवार प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।











