इंदौर नगर निगम का 60 मेगावॉट क्षमता वाला सोलर प्लांट अब तैयार हो चुका है, इसे शहर की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट को ग्रीन बॉन्ड के जरिए फंड किया गया है। इसका लोकार्पण 29 अप्रैल को मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे।
इस परियोजना को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह सोलर प्लांट खास तौर पर शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अहम माना जा रहा है। नर्मदा जल परियोजना के तहत पानी सप्लाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पंपिंग सिस्टम को ऊर्जा देने के उद्देश्य से इसे खरगोन जिले के जलूद गांव में स्थापित किया गया है।
जल सप्लाई सिस्टम को मिलेगी ताकत
नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 244 करोड़ रुपये ग्रीन बॉन्ड के जरिए जुटाए हैं। यह प्लांट सीधे तौर पर उस बिजली खर्च को कम करेगा, जो नर्मदा का पानी इंदौर तक लाने में लगता है।
इंदौर में पानी सप्लाई की पूरी व्यवस्था बिजली पर निर्भर है, इसलिए यह सोलर प्लांट इस सिस्टम को ज्यादा स्थिर और किफायती बनाएगा।
करोड़ों की होगी बचत
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से हर महीने 25 से 30 करोड़ रुपये तक बिजली खर्च में बचत होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि मार्च महीने में ही पंपिंग स्टेशनों के बिजली बिल में 3.64 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई, जो इस परियोजना की उपयोगिता को दर्शाती है।
यह बचत सीधे तौर पर नगर निगम की वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगी और अन्य विकास कार्यों में निवेश की संभावनाएं बढ़ाएगी।
9 साल में निकलेगी पूरी लागत
महापौर ने कहा कि यह सोलर प्लांट करीब 9 वर्षों में अपनी पूरी लागत निकाल लेगा। इसके बाद होने वाली बचत का लाभ शहर और नागरिकों को मिलेगा। यह परियोजना इंदौर को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
नगर निगम का मानना है कि इस पहल से न केवल बिजली की बचत होगी, बल्कि शहर को स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में भी मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में इंदौर में ऐसे और भी नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स पर काम किया जाएगा, जिससे शहर को टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।











