पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास की दिशा में बरेली नगर निगम ने एक बड़ी पहल की है। निगम शहर में प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल कर 23 नई सड़कों का निर्माण करने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 31 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
नगर निगम का दावा है कि यह कदम दोहरी चुनौती का समाधान करेगा। एक तरफ जहां शहर में प्लास्टिक कचरे के ढेर कम होंगे, वहीं दूसरी तरफ डामर-गिट्टी से बनने वाली पारंपरिक सड़कों की तुलना में ये सड़कें कहीं ज्यादा मजबूत और टिकाऊ साबित होंगी। इसी वजह से इन्हें ‘इको-फ्रेंडली’ सड़कों का नाम दिया गया है।
अनुकूल होंगी सड़कें
यह पूरी परियोजना नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत पूरी की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क निर्माण में डामर के साथ प्लास्टिक कचरे को मिलाने से उसकी गुणवत्ता बढ़ जाती है। इससे सड़क की उम्र लंबी होती है और वह भारी यातायात व मौसम की मार झेलने में अधिक सक्षम होती है।
योजना के तहत शहर के चारों जोन के 24 वार्डों में इन सड़कों का जाल बिछाया जाएगा। नगर निगम के एक्सईएन राजीव कुमार राठी ने बताया कि यह एक पायलट प्रोजेक्ट की तरह है।
मार्च से शुरू होगा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट
सड़कों के निर्माण के साथ-साथ शहर को कचरे के पहाड़ से मुक्त करने की भी तैयारी पूरी हो चुकी है। मार्च महीने से सथरापुर स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट काम करना शुरू कर देगा। इस प्लांट के संचालन की जिम्मेदारी ‘पाथ्या’ (PATHYA) एजेंसी को दी गई है, जिसके साथ नगर निगम का एमओयू भी हो चुका है।
फिलहाल, बरेली के 80 वार्डों से निकलने वाला करीब 500 मीट्रिक टन कूड़ा रोजाना बाकरगंज के डंपिंग ग्राउंड में फेंका जाता है, जिससे वहां कूड़े का पहाड़ बन गया है। नया प्लांट शुरू होने से इस समस्या का वैज्ञानिक तरीके से समाधान होगा। एजेंसी को कूड़ा निस्तारण के लिए 446 रुपये प्रति टन की दर से भुगतान किया जाएगा। इस प्लांट के शुरू होने से न केवल शहर में सफाई व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि पर्यावरण को भी बड़ा लाभ मिलेगा।











