MP को मिली 550 करोड़ की ग्रीन पावर सौगात, इस दिन भूमिपूजन करेंगे केंद्रीय मंत्री अमित शाह

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By Raj RathorePublished On: February 8, 2026
IISER

मध्यप्रदेश को ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी और भविष्य बदलने वाली सौगात मिलने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 13 फरवरी को भोपाल स्थित IISER में 550 करोड़ रुपये की मेगा परियोजना का भूमिपूजन करेंगे। इस प्रोजेक्ट के तहत सस्ती, स्वच्छ और टिकाऊ बिजली तैयार करने वाली आधुनिक तकनीकों पर बड़े स्तर पर रिसर्च होगी।

यह परियोजना ‘सोलर रिसर्च पार्क’ और ‘सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी सेंटर’ के रूप में विकसित की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार ने IISER को 52 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई है।

हाईटेक एनर्जी रिसर्च हब

यह प्रोजेक्ट पारंपरिक सोलर प्लांट से अलग होगा। यहां सूरज, हवा, पानी और ग्रीन हाइड्रोजन से ज्यादा और सस्ती बिजली बनाने पर वैज्ञानिक काम करेंगे। IISER के केमिस्ट्री, फिजिक्स, अर्थ एंड एनवायरनमेंटल साइंस, इलेक्ट्रिकल व केमिकल इंजीनियरिंग और AI विभाग मिलकर इसे विकसित करेंगे।

किन तकनीकों पर होगा काम?

  • सोलर पैनल की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना
  • रात और बादल के समय ऊर्जा स्टोरेज
  • बिजली ट्रांसमिशन में नुकसान कम करना
  • एआई आधारित ऊर्जा प्रबंधन
  • स्मार्ट ग्रिड, क्वांटम सेमीकंडक्टर और ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक

छात्रों के लिए बड़ा अवसर

इस प्रोजेक्ट से छात्रों को लाइव प्रोजेक्ट्स, इंडस्ट्री एक्सपोजर और एडवांस लैब में काम करने का मौका मिलेगा। इससे स्टार्टअप, पेटेंट और इंटरनेशनल रिसर्च सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। IISER में जल्द ही Renewable Energy में M.Tech कोर्स शुरू करने की तैयारी भी है।

13 फरवरी से होगी शुरुआत

सोलर रिसर्च पार्क का भूमिपूजन 13 फरवरी को अमित शाह करेंगे। कार्यक्रम में वैज्ञानिक, ऊर्जा कंपनियों के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता और प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। इसके साथ ही निर्माण कार्य भी औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा।

इन 5 बिंदुओं पर रहेगा फोकस

1. ज्यादा बिजली पैदा करने वाले सोलर सेल
2. सस्ता और टिकाऊ ग्रीन हाइड्रोजन
3. बिजली सप्लाई में नुकसान कम करना
4. कार्बन उत्सर्जन में कटौती
5. विंड एनर्जी को किफायती बनाना

IISER निदेशक ने क्या कहा?

IISER के निदेशक प्रो. गोवर्धन वास के अनुसार, 52 एकड़ में विकसित होने वाला यह प्रोजेक्ट रिन्यूएबल एनर्जी रिसर्च का बड़ा केंद्र बनेगा। यहां सौर ऊर्जा से अधिकतम बिजली उत्पादन और हाइड्रोजन तकनीक को ज्यादा प्रभावी बनाने पर फोकस रहेगा।