योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बीते नौ वर्षों में पर्यावरण संरक्षण को एक व्यापक जन-अभियान का रूप दिया है। राज्य सरकार के प्रयासों से अब तक 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। यह सिर्फ एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक भागीदारी का परिणाम भी है। Forest Survey of India द्वारा जारी ‘भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट-2023’ के अनुसार प्रदेश में 559.19 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र की वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस दिशा में उठाए गए ठोस कदमों की पुष्टि करता है।
वाराणसी का विश्व रिकॉर्ड: एक घंटे में 2.51 लाख पौधरोपण
Varanasi के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित ‘वृहद पौधरोपण कार्यक्रम’ ने वैश्विक स्तर पर नया कीर्तिमान स्थापित किया। काशीवासियों ने मात्र एक घंटे में 2,51,446 पौधों का रोपण कर Guinness World Records में अपना नाम दर्ज कराया। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश ने China के हेनान प्रांत द्वारा वर्ष 2018 में बनाए गए 1,53,981 पौधों के रिकॉर्ड को बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया। सुजाबाद डोमरी के लगभग 350 बीघा क्षेत्र को आधुनिक ‘शहरी वन’ के रूप में विकसित किया गया है, जो भविष्य में पर्यावरणीय संतुलन और पर्यटन दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
मिशन-2026: 35 करोड़ पौधों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
राज्य सरकार ने वर्ष 2026 के वर्षाकाल के लिए भी व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। आगामी चरण में 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बजट में सामाजिक वानिकी योजना के लिए 800 करोड़ रुपये, पौधशाला प्रबंधन हेतु 220 करोड़ रुपये और राज्य प्रतिकारात्मक वनरोपण योजना के लिए 189 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह वित्तीय प्रतिबद्धता दर्शाती है कि सरकार दीर्घकालिक पर्यावरणीय सुधार को प्राथमिकता दे रही है।
‘ग्रीन चौपाल’ से जनभागीदारी: गांव-गांव हरियाली का संदेश
मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप 2030 तक प्रदेश के हरित आवरण को 15 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस उद्देश्य से ‘ग्रीन चौपाल’ कार्यक्रम के जरिए पौधरोपण को जन-आंदोलन बनाया जा रहा है। अब तक 15,000 से अधिक गांवों में इन चौपालों का आयोजन किया जा चुका है, जिनकी अध्यक्षता ग्राम प्रधान करते हैं। इन बैठकों के माध्यम से ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है और उन्हें सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक सम्मान की पहल
सरकार ने पर्यावरण अभियान को केवल प्रशासनिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सामाजिक और भावनात्मक पहल से जोड़ा है। जुलाई 2025 में जन्मे बच्चों के अभिभावकों को ‘ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट’ और फलदार पौधे भेंट कर इस मुहिम से जोड़ा गया। यह कदम नई पीढ़ी को हरित भविष्य के प्रति जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लगातार बढ़ती भागीदारी और ठोस नीति-निर्माण के साथ उत्तर प्रदेश ‘हरित प्रदेश’ की अवधारणा को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।










