दावोस में गूंजा मध्यप्रदेश का औद्योगिक मॉडल, सीएम मोहन यादव बोले, निवेशकों ने दिखाया भरोसा

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By Abhishek SinghPublished On: January 23, 2026

दावोस में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मालदीव के मंत्री एवं अर्थशास्त्री डॉ. मोहम्मद सईद के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। इस दौरान पर्यटन, मत्स्य उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार मालदीव के साथ औद्योगिक और व्यावसायिक साझेदारी को मजबूती देने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने जानकारी दी कि निकट भविष्य में मालदीव की यात्रा कर निवेश और विकास से जुड़े नए अवसरों को आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में पर्याप्त भूमि संसाधन, भरोसेमंद बिजली आपूर्ति और सुदृढ़ परिवहन नेटवर्क उपलब्ध है। देश के मध्य में स्थित होने से मध्यप्रदेश की लॉजिस्टिक क्षमताएं निवेशकों के लिए लाभकारी हैं। इसके साथ ही कृषि, पोल्ट्री और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में कई निवेश प्रस्तावों पर समझौते हुए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

दावोस में दिखा एमपी के औद्योगिक विकास का असर

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि बीते दो वर्षों में मध्यप्रदेश में उद्योगों को मिली तेज गति का असर वैश्विक मंच वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में स्पष्ट रूप से नजर आया। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों, उद्योग जगत के दिग्गजों और व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ हुई चर्चाओं के बाद उन्होंने बताया कि निवेश, औद्योगिक विस्तार और नवाचार को लेकर प्रदेश में वैश्विक निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम-2026 में भारत का अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहा है। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है और अगले एक से डेढ़ वर्ष में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है, जिसमें मध्यप्रदेश भी देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

नवकरणीय ऊर्जा में एमपी ने बनाई राष्ट्रीय पहचान

मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत पहचान स्थापित कर ली है। प्रदेश में सौर, पवन और पंप स्टोरेज जैसी परियोजनाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। ओंकारेश्वर बांध के जलाशय क्षेत्र में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट के जरिए स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। साथ ही लगभग 32 लाख किसानों को सोलर पंप प्रदान कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। इन पहलों का परिणाम यह है कि मध्यप्रदेश आज देश में नवकरणीय स्रोतों से सबसे किफायती बिजली उपलब्ध कराने वाला राज्य बन चुका है, जिसे देखने और अपनाने में अन्य राज्य ही नहीं, बल्कि कई देश भी रुचि ले रहे हैं।