सेना को 18 साल से है ताबूत और बॉडी बैग मिलने का इंतज़ार

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नई दल्ली:अरुणाचल प्रदेश में वायुसेना के मिग 17 हेलीकॉप्टर क्रैश में मारे गए सात जवानों के शवों को गत्ते और प्लास्टिक में पैक किए जाने को लेकर काफी विवाद हुआ। जानकार हैरान हो जाएंगे कि पिछले 18 साल से भी ज़्यादा हो गए हैं लेकिन शहीद जवानों के शवों को ले जाने के लिए अभी तक ना तो ताबूत मिले और ना ही बैग पैक। 1999 में ऑपरेशन विजय के बाद पहली बार ताबूत और बैगपैक के लिए अधिकारिक रूप से इनकी जरूरत की मांग उठी थी।

इसके बाद 2 अगस्त 1999 में रक्षा मंत्रालय ने पहली बार इसका कॉन्ट्रैक्ट साइन किया जिसमें करीब 900 बैगपैक और 150 ताबूत की जरूरत थी।   उस समय 18 किलोग्राम वजन के ताबूत मांगे गए थे लेकिन जब इसकी सप्लाई की गई तो इसका वजन 55 किलोग्राम था।

जिसके बाद इसकी सीबीआई जांच शुरू हो गयी।   इस मामले में तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज को इस्तीफा भी देना पड़ा। इसके बाद इस सौदे को रोक दिया गया और 2001 में इस कॉन्ट्रैक्ट को रद्द कर दिया गया.

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