प्राचीन मंदिरों का धरोहर है,अमरकंटक

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नई दिल्ली :अगर आप क‍िसी ऐसे स्‍थान पर घूमने का मन बना रहे हैं जहां प्रकृति‍ और प्रचीनता दोनों का अहसास हो तो फ‍िर अमरकंटक चले जाएं। यह प्राचीन मंदिरों और नदियों का शहर है।1065 मीटर की ऊंचाई अमरकंटक ऊंचे पहाड़ों, घने जंगलों प्राचीन मंद‍िरों और नद‍ियों वाला खूबसूरत शहर है। यह वर्तमान में मध्‍यप्रदेश के अनूपपुर जिले में स्‍थि‍त है। अमरकंटक विंध्य व सतपुड़ा की पर्वत श्रृखलाओं में समुद्र तट से करीब 1065 मीटर की ऊंचाई पर है।

श्री ज्‍वालेश्‍वर महादेव मंदिर:अमरकंटक में भगवान शिव का मंद‍िर श्री ज्‍वालेश्‍वर महादेव स्‍थ‍ित‍ है। यहीं से जोहिला नदी की उत्‍पत्ति हुई है। मान्‍यता है क‍ि भगवान शिव ने यहां शिवलिंग की स्‍थापना की थी। मंद‍िर के करीब बने सनसेट प्‍वाइंट पर बड़ी संख्‍या में पयर्टक आते हैं।

कलचुरी काल के मंदिर:कलचुरी काल के मंदिरअमरकंटक में कलचुरी काल 1041-1073 ई. में बने मछेन्‍द्रथान और पातालेश्‍वर मंदिर जैसे कई प्राचीन मंदि‍र है। इन मंदिरों का न‍िर्माण तत्‍कालीन महाराजा कलचुरी कर्णदेव ने कराया था। यहां पर बड़ी संख्‍या में पयर्टक आते हैं।

नर्मदाकुंड:अमरकंटक में नर्मदाकुंड बेहद खूबसूरत जगह है। कहते हैं शिव और नर्मदा यहां निवास करते थे। यहां इसके क‍िनारे श्रीराम जानकी मंदिर, अन्‍नपूर्णा मंदिर, सिद्धेश्‍वर महादेव मंदिर, श्री सूर्यनारायण मंदिर जैसे कई मंद‍िर बने हैं। सोनमुदा:सोन नदी के उद्गम में जल की हल्की- फुल्की कुलबुलाहट पयर्टकों को बहुत भाती है। सोनमुदा नर्मदाकुंड से 1.5 किमी. की दूरी पर मैकाल पहाड़ियों के किनारे पर है। यह 100 फीट ऊंची पहाड़ी से बहती है। सुनहरी रेत के कारण ही इसे सोनमु्द्रा कहते हैं।

कपिलधारा:अमरकंटक का कपिलधारा झरना बहुत सुंदर है। घने जंगलों, पर्वतों के बीच से यह झरना करीब 100 फीट की ऊंचाई से गि‍रता है। यहां पर पयर्टक काफी मस्‍ती करते हैं मान्‍यता है क‍ि कपिल मुनी ने सांख्‍य दर्शन की रचना इसी स्‍थान पर की थी।

माई की बग‍िया:यहां पर बहने वाला दूधधारा झरना काफी लो‍कप्रिय है। माई की बग‍िया भी काफी खूबसूरत जगह है। यह बग‍िया माता नर्मदा को समर्पित मानी जाती है। इसके अलावा यहां एक गर्म जल वाला धुनी-धुनी झरना बहता है। जि‍समें नहाने से रोग दूर हो जाते हैं।

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