विवेकानंद के भगवा वस्त्रों का अनुसरण हो रहा : परिसंवाद में बोले दिग्विजय सिंह

सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि हिन्दू धर्म न कभी खतरे में था और न कभी खतरे में रहेगा।

इंदौर(Indore News): सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि हिन्दू धर्म न कभी खतरे में था और न कभी खतरे में रहेगा। देश में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सारे मुख्यमंत्री हिन्दू हैं उसके बावजूद भी यदि हिन्दू धर्म आज खतरे में है तो उसके लिए हिंदुत्व जिम्मेदार है। सिंह स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. द्वारा हिन्दू और हिंदुत्व विषय पर आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद को संबोधित कर रहे थे।

सिंह ने कहा कि हिन्दुस्तान में वर्षों तक मुस्लिमों और ब्रिटिशों का राज रहा और भी कई धर्म आए लेकिन सनातनी हिन्दू धर्म पर कभी खतरा नहीं आया।आज हिंदुत्व के नाम पर देशवासियों का रक्तचाप बढ़या जा रहा है। हिंदुत्व का एकमात्र लक्ष्य हो गया है कि समाज में किस तरह कटुता और धर्मान्धता फैलाई जाए।उन्होंने कहा कि आज राजधर्म की जरूरत है। गुजरात में दंगों के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने नरेन्द्र मोदी को राजधर्म निभाने की सलाह दी थी, उस सलाह पर अमल किया होता तो देश के हालात आज कुछ और होते।

पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कहा कि विनायक दामोदर सावरकर ने 1923 में लिखी अपनी पुस्तक में जिक्र किया था कि हिंदुत्व का हिन्दू धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। पिछले दिनों जब मैंने ये बात कही तो मुझे ट्रोल किया गया, आज मैं इस कार्यक्रम में यह पुस्तक लेकर हाज़िर हुआ हूँ। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व को राजनैतिक हथियार के रूप में उपयोग किया जा रहा है और मनमानी थोपी जा रही है जबकि धर्म आस्था का प्रश्न है। सभी धर्मावलंबियों की अपने-अपने धर्मों में आस्था है। सभी धर्मों के रास्ते अलग-अलग हैं लेकिन ईश्वर एक ही है। सर्व-धर्म समभाव भारत की आत्मा है यह हमारा इतिहास है यही संस्कृति और संस्कार भी है।

कांग्रेस सांसद सिंह ने कहा कि देश में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ करने का क्रम चल रहा है। उन्होंने बताया कि श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने पंडित जवाहर लाल नेहरु की कैबिनेट में रहते हुए कश्मीर में धारा 370 लागू करने वाले फैसले का समर्थन किया था। इस फैसले में पं. मुखर्जी की सहमति थी। उन्होंने बताया कि आजादी से पहले हिन्दू महासभा, आर.एस.एस. के नेता गुरुजी गोलवलकर, डॉ. हेडगेवार, विनायक दामोदर सावरकर आदि ने हिन्दू समाज की अगुवाई की और मोहम्मद अली जिन्ना ने मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व किया।

इन लोगों ने आजादी की लड़ाई में कभी भी महात्मा गांधी का साथ नहीं दिया बल्कि ये लोग ब्रिटिश हुकूमत के साथ चलते रहे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकागो के विश्व सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद जी ने सनातन हिन्दू धर्म की जो व्याख्या की उसे आज भी याद रखा जाना चाहिए। आज कुछ लोग स्वामी विवेकानंद के भगवा वस्त्रों का अनुसरण करके हिंदुत्व की विचारधारा लागू करना चाह रहे हैं जिसका हिन्दू धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने कहा कि हिंदुत्व के नाम पर देश में साम्प्रदायिकता का जहर घोला जा रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से नई पीढ़ी को बर्बाद किया जा रहा है। मैंने पिछले दिनों संसद में कहा कि यह एक ऐसा जिन्न है जो बोतल में ही ठीक है, यदि वह बोतल से बाहर आ गया तो उसे वापस बोतल में डालना असंभव हो जायेगा। अंत में सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी से बेहतर कोई हिन्दू इस देश में नहीं था और उनके पैर छूने के बहाने उनकी हत्या करने वाला हिंदुत्ववादी था। यही आज के परिसंवाद का सार है।

विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ अभिभाषक एवं विचारक अनिल त्रिवेदी ने कहा कि हिन्दू एक व्यापक शब्द है जिसे हिंदुत्व के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता। आज के दौर में हिन्दू धर्म के तथाकथित कर्णधारों ने स्वयं को जेड प्लस सुरक्षा में कैद कर लिया है जबकि एक वक्त था जब हम जैसे साधारण कार्यकर्ता शंकराचार्य से बड़ी आसानी और इत्मिनान से मिल आए थे।

दुर्भाग्य है कि आज के दौर में हिन्दू शब्द की व्याख्या अपने मुताबिक की जा रही है। त्रिवेदी ने कहा कि यह देश गांधी के विचारों का देश है लेकिन आज गांधी के हत्यारों को महिमामंडित किया जा रहा है। सच बोलने से लोगों को रोका जा रहा है। देश की जनता किसी भी मुद्दे पर खुलकर चर्चा करने से भी डरने लगी है। उन्होंने तेजी से बिगड़ रहे हालात के लिए सोशल मीडिया यूनिवर्सिटी को जिम्मेदार बताया। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन प्रकाश ने पूर्व मुख्यमंत्री से सवाल-जवाब किये।

पत्रकार हर्षवर्धन प्रकाश के प्रश्न और दिग्विजय सिंह के जवाब

प्रश्न – हिन्दी व्याकरण के लिहाज से जब माता होने का भाव “मातृत्व” और पिता होने के भाव ‘‘पितृत्व’’ कहा जाता है, तो हिंदू होने के भाव को “हिंदुत्व” कहे जाने में क्या आपत्ति हैउत्तर – माता का स्वरुप करुणा प्रेम और सद्भाव का होता है इसलिए उसे मातृत्व कहा जाता है। पिता का स्वरुप एक आदर और सम्मान का होता है इसलिए उसे पितृत्व कहा जाता है। हिन्दू का चरित्र सर्वधर्म समभाव का होता है, सबको समानता से देखने का होता है, सभी धर्मो का आदर करने का होता है, जो हिंदुत्व में नहीं है।

प्रश्न – क्या यह भाजपा की रणनीतिक जीत और कांग्रेस की रणनीतिक हार नहीं है कि देश का पूरा राजनीतिक विमर्श हिंदुत्व पर केंद्रित कर दिया गया है और क्या भाजपा ने कांग्रेस को इस विषय पर बात करने पर मजबूर कर दिया है?
उत्तर – हमें किसी ने मजबूर नहीं किया है। देश में 1947 में जो पार्टीशन हुआ पार्टीशन में एक ऐसा मन-मुटाव पैदा हो गया था।

जब पाकिस्तान और हिन्दुस्तान का विभाजन हुआ कि एक दूसरे पर अविश्वास की स्थिति बन गई थी और इसी आधार पर मजबूरी में महात्मा गाँधी को इस धार्मिक उन्माद को प्रेम और सद्भाव में बदलने के लिए 15 अगस्त के दिन दिल्ली में न रहते हुए कलकत्ता में जाकर मुसलमान के घर बैठना पड़ा। उन्होंने सामंजस्य बैठाने के लिए ये कोशिश की थी तो इसमें किसी की जीत नहीं थी। मैं कहता हूँ ये देश, समाज व धर्म की हार है, जो लोगों ने हिंदुत्व को हिन्दू धर्म समझ लिया। जब चुनाव पास आते हैं तो हिन्दुस्तान-पाकिस्तान, हिन्दू-मुसलमान, शमशान-कब्रिस्तान इसके अलावा दूसरे मुद्दे नहीं रहते।

प्रश्न – भाजपा द्वारा मुस्लिमपरस्त नेता की छवि बनाए जाने को कैसे देखते हैं और क्या मुस्लिमपरस्त नेता होने का बार-बार लगाया जाने वाला आरोप परेशान करता है?
उत्तर – मैं स्कूल-कालेज इंदौर में पढ़ा हूँ जहाँ मैं स्पोर्ट्समेन था। जो स्पोर्ट्समेन होता है उसे टीका-टिप्पणियों की परवाह कभी नहीं होती है। मैं ऐसे लोगों की परवाह नहीं करता जिसे जो कहना है कहने दीजिये। कोई मुझे गाली भी देता है तो मैं स्वीकार नहीं करता उसे रिटर्न विथ थैंक्स कर देता हूँ।

प्रश्न – क्या कांग्रेस ने “सॉफ्ट हिंदुत्व” की राह अख्तियार करते हुए मुसलमानों को उनके हाल पर छोड़ दिया है?
उत्तर – ये सॉफ्ट हिंदुत्व और हार्ड हिंदुत्व कुछ होता ही नहीं है। पहली बात तो हिंदुत्व कुछ है ही नहीं। मैं इस बात को शुरू से कहता आया हूँ कि किसी भी धर्म का व्यक्ति हो यदि वो धर्म को हथियार मान कर दूसरे धर्म के प्रति नफरत या असम्मानजनक बात करता है उस पर कार्रवाई होना चाहिए।

प्रश्न – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कौन-सा काम आपको दिल से पसंद है?
उत्तर – उनका संगठन।

प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत कमल कस्तूरी, नईम कुरैशी, सोनाली यादव, शीतल रॉय, हिमानी सिंह ,अजय भट्ट, गगन चतुर्वेदी, कृष्णकांत रोकड़े ने किया। स्मृति चिन्ह विवान सिंह राजपूत, प्रियंका पांडे एवं विजय गुंजाल ने भेंट किए। अंत में आकाश चौकसे ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में विधायक संजय शुक्ला, विशाल पटेल, पूर्व विधायक अश्विन जोशी, शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल, जिला अध्यक्ष सदाशिव यादव, कांग्रेस नेता रघु परमार और डॉ अमीनुल खान सूरी सहित गणमान्य जन व मीडियाकर्मी मौजूद थे।