ज्योतिष शास्त्र के अनुसार घर का निर्माण करते समय या घर मे प्रवेश के बाद वस्तु शास्त्र से अनुसार ही घर का इंटीरियर डिजाइन किया जाता हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वास्तु शास्त्र का बहुत अधिक महत्व होता है कहते हैं कि अगर घर में वास्तु दोष हो तो ग्रह कलेश, रोग, विपरीत बुद्धि, नकारात्मक ऊर्जा जैसे कई चीजों का सामना करना पड़ता है। इसीलिए घर बनाते समय या फिर घर में निवास करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। ताकि किसी भी प्रकार के वास्तु दोष से परिवार को हानि नहीं पहुंचे। इसके लिए वास्तु शास्त्र में कुछ नियम बताए गए हैं और नियमों का पालन करके घर के वास्तु दोष को दूर किया जा सकता है। क्योंकि वास्तु दोष के होने से घर में नकारात्मकता ऊर्जा उत्पन्न होती है,इसीलिए वास्तु दोष का निवारण अति आवश्यक है। ताकि घर में सुख समृद्धि और सकारात्मक उर्जा और माता लक्ष्मी का वास रहे। इसके लिए आज के इस आर्टिकल में हम आपको वास्तु शास्त्र से जुड़ी कुछ जानकारी दे रहे हैं, जिसके जरिए आप अपने घर के वास्तु दोष को दूर कर सकते हैं।

घर का मुख्य द्वार

वासु शास्त्र की अगर बात करे तो इसकी शुरुआत घर के मुख्य द्वार से ही करते है। घर का मुख्य द्वार हमेशा आकर्षक होता है क्योंकि मुख्य द्वार को देखकर ही हर कोई घर मे प्रवेश करना चाहेगा। घर के मुख्य दरवाजे को देखकर घर के अंदर के माहौल व साफ-सफाई का पता चलता है। इसीलिए घर का मुख्य द्वार हमेशा साफ और स्वच्छ होना चाहिए। घर का द्वार अच्छी स्थिति में होना चाहिए, दरवाजे को खोलते या बंद करते समय किसी भी प्रकार की आवाज नहीं आए। दरवाजे पर पेंट किया हुआ होना चाहिए, पेंट उखड़ा हुआ नहीं होना चाहिए। घर का मुख्य द्वार कभी भी टूटा हुआ या उसमें दरार नहीं होना चाहिए।

स्वच्छता का रखें ध्यान

घर के अंदर प्रवेश करने के बाद अब बात आती है स्वच्छता की। घर की साफ-सफाई करते रहना बहुत ज़रुरी है। यह सेहत के लिए तो अच्छा है ही लेकिन घर की साफ सफाई नही करने से कई तरह के वस्तु दोष उत्पन्न होते है। इसीलिए घर मे मकड़ी के जाले, धूल मिट्टी, गंदगी नहीं होना चाहिए। घर का बाथरूम भी हमेशा साफ होने चाहिए। घर मे साफ – सफाई होने से माता लक्ष्मी का वास होता है। इसीलिए घर को हमेशा साफ रखना चाहिए।

पूजा घर का स्थान

पूजा घर हमारे घर का सबसे पवित्र स्थन में से एक होता है। इसीलिए हमें कुछ विशेष बातों का ध्यान रखने की जरूरत होती है। पूजा घर साफ होना चाहिए क्योंकि यहां से ही सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। घर के लोगों की तरक्की के लिए व घर की सुख शांति समृद्धि के लिए भी पूजा घर का स्थान उत्तर-पूर्व मतलब ईशान कोण में होना चाहिए। क्योंकि यही देवताओं का स्थान होता है। इस दौरान इस बात का भी विशेष तौर पर ध्यान रखना चाहिए कि पूजा घर के ऊपर या नीचे सीढ़ी या बाथरूम किचन नहीं होना चाहिए। इस स्थान को हमेशा साफ और स्वच्छ रखना चाहिए व नियमित सफाई होना चाहिए।

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सकारात्मक ऊर्जा के लिए जलाएं कपूर

घर में पूजा पाठ और आरती होने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और सुख समृद्धि रहती हैं। इसीलिए घर में सुबह शाम आरती होना चाहिए, इससे नकारात्मक ऊर्जा घर मे नही आती हैं। सुबह और शाम में कपूर जलाने से कई वास्तु दोष का नाश हो जाता है, इसीलिए घर में सुबह शाम कपूर जलाना चाहिए। ताकि सुख शांति समृद्धि बनी रहे।

सोने की दिशा का रखें ध्यान

सोना सेहत के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन इसके लिए भी सही दिशा में सोना जरूरी है। गलत दिशा में सोने से सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसीलिए वास्तु शास्त्र के अनुसार कभी भी दक्षिण दिशा की ओर पैर करके नहीं सोना चाहिए, क्योंकि इससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, इसीलिए सोने के लिए हमेशा दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोना चाहिए।