उत्तम स्वामी जी – जन्माष्टमी पर जन्मे इसलिए नाम था’गोवर्धन’

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श्रीधर पराडकर जब पहली बार उत्तम स्वामी से उनके प्रवचन मे मिले थे और उनसे काफी प्रभावित हुए थे .उनके प्रवचन की आकर्षक शैली, सरल शब्द रचना और सहज प्रस्तुति उन्हें आकर्षित कर गई श्रीधर जी ने उनपे किताब लिखी है जिसका नाम ‘सिध्द्योगी-श्री उत्तम स्वामी’ है.हम उसीके कुछ अंश रोज आपके साथ साझा करेंगे .

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चंदनम न वने वने
महाराष्ट्र प्रान्त के अमरावती जिले की तहसील नांदगाँव का एक सामान्य गाँव है लोह्गाँव . उसकी कहानी भारत के अन्य लाखों गाँव के समान अनकही रह जाती. लोह्गाँव का नाम गुमनामी के अंधेरों मे छुपा ही रह जाता . परन्तु सानप कुलोत्पन्न उत्तम स्वामीजी के अत्युत्तम कर्म और उत्तमोत्तम कीर्ति ने लोह्गाँव को देश ही नहीं विदेश मे भी ख्यात कर दिया .

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उत्तम स्वामीजी का जन्मस्थान है लोह्गाँव. वर्तमान मे मे लोह्गाँव की जनसँख्या लगभग तिन हजार है .कुछ गिनेचुने मकान ही पक्के है .बिजली है पर रहती कम है. प्राथमिक विद्यालय का सामान्य सा भवन है इसी विद्यालय मे उत्तम स्वामी ने प्राथमिक अक्षर ज्ञान प्राप्त किया है .इसी ग्राम मे सानप उपनाम का एक क्षत्रिय परिवार है, बताया जाता है भक्त शिरोमणि मीराबाई का जन्म इसी कुल मे हुआ था. इसी परिवार के पुत्र थे किशनराव सानप और इनके पुत्र थे देविदास सनाप जो नाथ संप्रदाय के शांतिनाथ महाराज के शिष्य है . देविदास जी और कलावती बाई के तिन पुत्र थे जिनका नाम मधुकर, अनिल और गोवर्धन. जो तीसरे पुत्र है गोवर्धन यही उत्तम स्वामी के नाम से जाने जाते है .

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उत्तम स्वामी के जन्म के पूर्व से ही उनके माता पिता को शुभ संकेत मिलने लगे थे. उनकी माता को स्वप्न मे चतुर्भुज धारी देवता के दर्शन हुए थे, भगवन ने स्वयम बताया थ की मै तुम्हारे घर आने वाला हु, और वो देवता बालक रूप मे परिवर्तित हो गए .दुसरे दिन यही स्वप्न उनके पिता को भी आया.

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वर्षा ऋतू प्रारंभ हो चुकी थी .कई दिनों से निरंतर बारिश हो रही थी . सानप परिवार के घर के कवेलू पानी रोक नही पा रहे थे .लेकिन प्रकृति के के नियमानुसार कलावती बाई को प्रसव पीड़ा होने लगी और संतति के जन्म के लक्षण दिखने पर दाई को बुलाया गया. इधर वर्षा रुकने का नाम नही ले रही थी तो छाते के सहारे वर्षा से बचाते हुए सायंकाल मे उनके वहा तीसरे पुत्र का जन्म हुआ .दिन था शुक्रवार और तिथि अष्टमी . कृष्ण जन्माष्टमी का शुभ पर्व था तो नवजात का नाम कृष्ण के नाम पे रखा गया ‘गोवर्धन’.

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