ये है अमरनाथ गुफा के अनसुने राज, जानकर चौंक जायेंगे आप | Unheard Secret of Amarnath Cave

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अमरनाथ गुफा के रहस्य के बारे में तो सबकों पता ही होगा। आज हम आपकों इस पवित्र गुफा से जुड़ी कुछ खास बातें बताने जा रहे जो शायद ही आपकों पता हो। अमरनाथ की गुफा को सबसे पवित्र गुफाओं में से एक माना जाता है पवित्रता के साथ यहां प्रकृति के कुछ ऐसे दृश्य भी है जिन्हें देख कर लगता है कि मानों हम स्वर्ग की सुंदरता को देख रहे हो।

इस पवित्र गुफा की मान्यता है कि इस गुफा में भगवान शंकर ने पार्वती को अमरकथा सुनाई थी, जिसे सुन कर सद्योजात शुक-शिशु शुकदेव ऋषि के रूप में अमर हो गए। आज भी अमरनाथ की इस गुफा में कबूतरों का एक जोड़ा दिखाई देता है, जिन्हें अमर पक्षी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिन श्रद्धालुओं को इन कबूतरों का जोड़ा दिखाई देता है, उन्हें स्वयं शिव-पार्वती दर्शन देते हैं और मोक्ष प्रदान करते हैं।

पुराणों में बताया गया है कि भगवान शिव ने यह ‘अनीश्वर कथा’ पार्वती को अमरनाथ की गुफा में ही सुनाई थी। इसीलिए यह बहुत पवित्र मानी जाती है। शिव ने पार्वती को ऐसी कथा भी सुनाई थी, जिसमें यात्रा और मार्ग में पड़ने वाले स्थलों का वर्णन भी था। यह कथा अमरकथा नाम से जानी जाती है।

यहां आज भी मौजूद है शेषनाथ

कई विद्वानों का कहना है कि शंकर जब पार्वती को अमर कथा सुनाने ले जा रहे थे, तो उन्होंने अपने साथ मौजूद हर जीव-जन्तु आदि को रास्तंे में ही छोड़ दिया था। उन्होंने छोटे-छोटे अनंत नागों को अनंतनाग में छोड़ा था। अपने माथे के चंदन को चंदनबाड़ी में उतारा और अन्य पिस्सुओं को पिस्सू टॉप पर छोड़ दिया था। भगवान शिव ने अपने गले के शेषनाग को शेषनाग नामक स्थल पर छोड़ा था। माना जाता है कि आज भी शेषनाग नामक स्थल पर मौजूद झील में शेषनाथ है और 24 घंटे में एक बार यह दर्शन देतें है।

पहली बार अमरनाथ को एक मुसलमान ने पता किया था

अमरनाथ की इस पवित्र गुफा के बारे में सबसें पहले सोलहवीं शताब्दी में पता हुआ था। जो कि पूर्वाध में एक मुसलमान गड़ेरिए ने पता किया था। इसी वजह से आज भी अमरनाथ को आने वाले चढावें में से चैथाई हिस्सा मुसलमान गड़रिए के वंशजों को मिलता है।

अमरनाथ हिंदुओं का एक ऐसा तीर्थस्थल है, जहां फूल-माला बेचने वाले मुसलमान होते हैं। अमरनाथ में एक ही गुफा नहीं है, बल्कि अमरावती नदी पर आगे बढ़ते समय और कई छोटी-बड़ी गुफाएं दिखती हैं। सभी बर्फ से ढकी हैं। मूल अमरनाथ से दूर गणेश, भैरव और पार्वती के वैसे ही अलग-अलग हिमखंड भी है।

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