‘जश्न-ए-राहत‘ में बोलीं ताई – हमारा गुरूर हैं राहत साहब

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इंदौर। इंदौर के अभय प्रशाल में 4 दिसंबर की रात को आयोजित ‘जश्न-ए-राहत‘ ने समां बांध दिया। हजारों लोगों के बीच देश के जाने-माने कवि और गजलकार ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया। ये अनूठा आयोजन देश-दुनिया में इंदौर का नाम रोशन करने वाले मशहूर शायर राहत इंदौरी के मंच पर शायरी के 50 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था। इस मौके पर राहत इंदौरी की जिंदगी के वो वाकेआत जिसमें मज्ञा है, मस्ती है, जज्बात है, दर्द है, आंसू हैं, फक्फड़पन है, मदहोशी है और रिश्तों का ताना-बाना से बुनी इजरा का विमोचन किया गया।

इस किताब को हिदायतउल्लाह खान ने लिखा है। कार्यक्रम के दौरान पर सभी नेताओं की तरफ से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन मंच पहुंची और अपने शायराना अंदाज में बोलीं- ‘मुझे मालूम है ये मेरा मंच नहीं है, मगर मुझे इसका जरा भी रंज नहीं हैं‘। उन्होंने राहत इंदौर का नाम लेते हुए कहा कि आपके साथ इंदौर का नाम पूरी दुनिया में बड़ी इज्जत से लिया जाता है। राहत साहब हमारा गुरूर हैं आप। इसके बाद गुलाबी ठंड के बीच शायराना अंदाज की धीमा-धीमा सुरूर चढ़ने लगा है। मंच का संचालन कर रहे कवि कुमार विश्वास एक पल हंसी नहीं रूकने दी।

कार्यक्रम शुरूआत शायर जुबैर अली ताबिश ने अपने शायराना अंदाज के साथ की। उन्होंने कहा- ‘ वैसेतो मेरे मकां तक तू चला आता है, फिर अचानक से तेरे जहन में क्या आता है। तेरे खत आज लतीफों की तरह लगते हैं, खूब हंसता हूं जहां लफ्ज ए आता है… ने समां बांध दिया। इसके बाद अमरावती के अबरार काशिफ की लाइन ‘ मौज ए तूफां तेरी उम्मीद नहीं तोड़ूंगा, मैं किनारे की तरफ नाव नहीं मोड़ूंगा… ने खूब दाद बटोरी। इसके बाद देर रात तक कार्यक्रम में चलता रहा है। इस ‘जश्न-ए-राहत‘ कार्यक्रम में मशहूर जावेद अख्तर, वसीम बरेलवी, सूर्यभानु गुप्त, सत्यनारायण सत्तन, कुमार विश्वास, स्वानंद किरकिरे, अजहर इनायती, नईम अख्तर खादमी, ताहिर फराज, शकील आजमी, अबरार काशिफ, सरफाज मुकादम, मुश्ताक अहमद मुश्ताक, नईम फराज और जुबेर अली ताबिश शामिल हुए। इस आयोजन में पहली बार फैमिली गैलरी रखी गई थी।

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