सियाचिन : दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में गई जवानों की जान, बाकी को ऐसे बचाया

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सियाचिन। दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर के बर्फीले तूफान में दबने से छह जवानों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि आठ जवानों की टुकड़ी सिचायिन के बर्फील क्षेत्र में पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी बीच तूफान की चपेट में आ गए थे। हालांकि बर्फीले तूफान में दबे जवानों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू आॅपरेशन चलाया गया, लेकिन केवल चार जवानों को ही बचाया जा सका। बताया जा रहा है कि यह हादसा 19 हजार फीट की ऊंचाई पर हुआ था।

सैन्य प्रवक्ता के मुताबिक 19 हजार फुट की ऊंचाई पर सियाचिन ग्लेशियर के उत्तरी सेक्टर में काम कर रहे आठ कर्मचारी हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे। सूचना मिलते बर्फ में दबे आठ लोगों को निकालकर हेलिकॉप्टर से सैन्य अस्पताल में पहुंचाया गया। जहां इलाज के दौरान छह जवानों की मौत हो गई। इससे पहले 10 नवंबर कुपवाड़ा में हिमस्खलन की चपेट में आने से दो सैन्य पोर्टरों की मौत हो गई थी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने 1984 में दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन में जवानों को तैनात करना शुरू किया था। दरअसल, इस दौरान पाकिस्तान की ओर से अपने सैनिकों को भेजकर यहां कब्जे की कोशिश की गई थी। इसके बाद से लगातार यहां जवानों की तैनाती रही है।

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