नितिनमोहन शर्मा

जैसे जनसमुद्र हिलोर मार रहा हो। जहां तक नजर दौड़ाओ…श्रद्धा से झुके शीश ही शीश नजर आ रहे हैं। पांडाल तो पहले ही दिन छोटा पड़ गया। अगल बगल की बड़ी सड़कों से लेकर गलियों तक मे आस्था की जाजम रोज बिछ रही है। आसपास के मकान बंगलो वालो ने भी घर के दरवाजे खोल दिये है। छत पर सफेद शामियाने भी तान दिए ताकि जिन्हें जगह नही मिले, वे छत से बेठकर रसानंद ले सके। हजारों हजार तो कथा पांडाल भी छोड़ने को तैयार नही। ओढ़ने बिछाने का कम ज्यादा की चिंता किये बगेर सर्द राते पांडाल में ही गुजर रही है।

कथा दोपहर 2 बजे से लेकिन पांडाल 10 बजे से ही लबालब भराना शुरू हो जा रहा है। मातृशक्तियो के जत्थे के जत्थे सुबह से झोले झंडे उठाकर कथा स्थल की तरफ जाते हुए देखने के नजारे बड़ा गणपति से लेकर एयरपोर्ट तक ओर मरीमाता बाणगंगा से दलालबाग तक रोज दिख रहे है। माहौल ऐसा जैसे कोई लघु कुंभ हो। ये नज़ारा है उस शिव महापुराण कथा का जिसने इंदौर में इतिहास रच दिया है। अब तक का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन की संज्ञा इस कथा को उन्ही लोगो ओर नेताओ में दी है जो इस तरह की कथा वार्ता नियमित करवाते रहते हैं। सब भौचक है आस्था के प्रति उमड़ते सैलाब को देखकर। हर तरफ बस हर हर महादेव का जयघोष ओर ॐ नम: शिवाय का भाव।

व्यासपीठ पर पँडित प्रदीप मिश्रा विराजमान है। इलाके के विधायक संजय शुक्ला जजमान है। उनकी टीम का मैनेजमेंट भी गजब का चल रहा है। जो बंदोबस्त किए थे वो तो पहले ही दिन नाकाफी साबित हुए। हालात ये है कि 60 फीसदी व्यवस्था फिर से खड़ी करना पड़ी। भीड़ पुलिस लाइन तक जमीन पर बैठ रही है। दूसरी तरफ का सिरा इंदौर वायर चोराहें से होता हुआ वीआईपी रोड तक पसर गया है। नतीज़तन साउंड व्यवस्था दुगनी करना पड़ी। जहा महाराज श्री ठहरे है, उस मल्हारगंज में अलसुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। पँडित मिश्रा को बालकनी में आकर झलक देने तक लोग डटे हुए रहते है।

टीम शुक्ला का मैनेजमेंट जबरदस्त

कथा के पहले अनुमान आयोजको भी नही था कि इतनी भीड़ जुटेगी। बड़ी संख्या के दिव्यांग भी इसी आस से आ रहे है कि बस महाराजजी की एक झलक मिल जाये। टीम शुक्ला ऐसे लोगो का विशेष ध्यान रख रही है। पूरे मैनेजमेंट में परदे के पीछे के किरदार सुनील अग्रवाल है। अग्रवाल ओर उनके साथी दो घण्टे की नींद भी नही ले पा रहे है। इस बीच राहुल गांधी की यात्रा भी आ गई।

कथा ओर यात्रा के बीच का बंदोबस्त ओर तालमेल बैठाने जैसी कठिन चुनोती से भी इस टीम ने दो दो हाथ किये और अपने नेता को कही भी नीचे नही देखने दिया। जो पांडाल में ही रात बीता रहे है, उनके लिए ओढ़ने बिछाने से लेकर चाय नाश्ता ओर भोजन का प्रबंध भी इसी टीम का हिस्सा है। ये ही नही रात गुजारने वालो के लिए अलसुबह से नित्य क्रिया का काम भी टीम के जिम्मे है ताकि स्वच्छ शहर पर किसी भी प्रकार की आंच न आये।