मध्यप्रदेश की जेलों में ठूस-ठूस कर भरे है कैदी, गृहमंत्री की बात से खुलासा

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भोपाल। मध्यप्रदेश की जेलों में क्षमता से 47 फीसदी ज्यादा कैदी बंद हैं। जेलों की क्षमता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। 125 जेलों में वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा मौजूद है। यह जानकारी गृह मंत्री बाला बच्चन ने विधानसभा में दी है। कई जेलों में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होने पर भी बहस जारी है। दूसरे इंतजामों पर भी सवाल हैं। देश के मामले में भी तस्वीर अच्छी नहीं है।

क्षमता से डबल कैदी
31 दिसंबर 2018 तक प्रदेश की जेलों में 42 हजार 57 कैदी बंद थे, लेकिन जेलों की क्षमता 28601 कैदियों की ही है। कांग्रेस विधायक मुन्नालाल गोयल के सवाल का जवाब गृह मंत्री दे रहे थे। इस मामले पर भी सियासत जारी है। भाजपा सवाल उठा रही है तो कांग्रेस का कहना है कि आपकी सरकार पंद्रह साल रही, उसमें सुधार क्यों नहीं किए गए। कांग्रेस सरकार ने तो तैयारी कर ली है। अगले छह महीनों में ही अच्छे नतीजे देखने को मिलेंगे।

67 फीसदी पर अब भी फैसला नहीं
एनसीआरबी के आंकड़े कह रहे हैं कि देश की 1400 जेलों में 4 लाख 33 हजार कैदियों में से 67 फीसदी पर अब भी फैसला नहीं हो पाया है। जेलों में 1942 बच्चे भी हैं, जो मां के साथ सजा काट रहे हैं। 31 दिसंबर 2016 तक 4 लाख 33 हजार 303 कैदी बंद थे, जिनमें से एक लाख 35 हजार 683 पर इल्जाम साबित हो गए हैं। दो लाख 93 हजार 58 विचाराधीन हैं। वहीं 3098 कैदी छोड़ दिए गए हैं। कई जेलों में कैदियों को बढिय़ा जिंदगी देने के लिए संगीत, ज्योतिष की पढ़ाई, हुनर और कई चीजें सिखाने के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। तिहाड़ के कैदियों की अच्छी कोशिशें अकसर मीडिया में छाई रहती हैं।

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