रेप की जांच में पिछड़ रहा देश 24000 में से 4 फीसदी मामलों पर ही सुनवाई

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पी. यादव-

नई दिल्ली। आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों में दर्ज रेप के मामलों की जांच समय पर नहीं हो रही है। कानून में इसके लिए 180 दिन की मियाद तय है, लेकिन पिछले साल जनवरी से जून के बीच दर्ज 24 हजार मामलों में से चार फीसदी की ही जांच समय पर पूरी हुई।

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, यूपी, हरियाणा जैसे राज्यों में हालात ज्यादा खराब हैं। रोजाना नए मामले दर्ज हो रहे हैं, इस कारण पुलिस को जांच समय पर पूरी करने का वक्त नहीं मिल रहा है। कई राज्यों में रेप मामलों की तुरंत सुनवाई के लिए अलग से अदालतें भी नहीं हैं। श्द हिंदू्य के मुताबिक कई राज्यों में फास्ट ट्रैक कोर्ट को रेप मामलों की सुनवाई करना है, लेकिन दूसरे मामलों के कारण नहीं हो पा रही।

खोली जाएगी 1023 अन्य अदालतें

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 664 विशेष अदालतें, 2021 लोक अभियोजकों और 1023 अन्य अदालतें खोलने की योजना है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते कहा था कि निचली अदालतों में रेप के 24 हजार में से केवल चार फीसदी मामलों की ही सुनवाई समय पर पूरी हो पाई। ये आंकड़े इस साल जनवरी से जून के बीच के हैं।

गृह मंत्रालय ने किया ITSSO का गठन

फरवरी में गृह मंत्रालय ने रेप के मामलों पर नजर रखने के लिए इंवेस्टिगेशन ट्रैकिंग सिस्टम फॉर सेक्सुअल अफेंसेस (ITSSO) बनाया है। इसकी जिम्मेदारी है कि देश भर में हो रहे रेप के मामलों की सुनवाई पर नजर रखे। इसे सीसीटीएन से जोड़ा गया है। इसके दायरे में देश के पंद्रह हजार थाने जोड़े गए हैं। सात राज्यों में नजर रखने पर आईटीएसएसओ के आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा, दिल्ली, मध्यप्रदेश, यूपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तराखंड में 47662 मामलों में से केवल 26343 मामलों की ही समय पर जांच पूरी हो सकी।

पॉक्सो के मामले अधिक- डीजीपी ओपी सिंह

यूपी के डीजीपी ओपी सिंह के मुताबिक पॉक्सो के मामले ज्यादा दर्ज हो रहे हैं। इनकी जांच के लिए एक महीने में सुनवाई कर सजा दिलाने का दबाव रहता है। लिहाजा, दूसरे मामले अटक जाते हैं। अभी 180 मामले आए हैं, जिनमें हमने गवाहों, फोरेंसिक टेस्ट पर ज्यादा जोर दिया, लेकिन निचली अदालतें फिर भी वक्त लगाती हैं। कुछ जिलों में अलग फास्ट ट्रैक अदालतें नहीं हैं, तो बाकी अदालतें पॉक्सो के मुकाबले दूसरे मामलों की सुनवाई पहले करती हैं।

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