खुलासा: 25 फीसदी लोग ही बोलते हैं हिंदी

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नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह जब कहते हैं कि हिंदी ही ऐसी भाषा है, जो देश को जोड़े रख सकती है, तब आंकड़े उनकी सोच के खिलाफ जाते हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में केवल 25 फीसद भारतीय ही हिंदी बोलते हैं।आंकड़ों के मुताबिक हिंदी बोलने वालों में केवल 60 फीसद हैं, जो बोलचाल में मातृभाषा का इस्तेमाल करते हैं। यह आंकड़ा कुल आबादी का 25 फीसद होता है। इसके बाद मराठी, तमिल, बंगाली, तेलुगू और गुुजराती का नंबर आता है। क्षेत्रीय बोलियों में राजस्थानी, भोजपुरी, मगधी और हरियाणवी का नंबर आता है। हिंदी दिवस पर अमित शाह ने ट्विट किया था कि भारत अलग-अलग भाषाओं का देश है। हर भाषा का अपना महत्व है, लेकिन यह बहुत खास है कि जो भाषा पूरे देश को जोड़े रखती है, वह हिंदी है। दुनिया में यही भारत की पहचान भी है।

काटजू ने हिंदी को बंटवारे की भाषा बताया


सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे मार्कंडेय काटजू ने कहा कि हिंदी तो बंटवारे की भाषा है। अंग्रेजों ने इस भाषा का इस्तेमाल हम भारतीयों को बांटने के लिए किया था। यह आम आदमी की भाषा कतई नहीं है। इस पर भड़के कुमार विश्वास ने ट्विट किया- ‘हे चिर मुख अतिसार व्याधि पीडि़तÓ… मैं इस नासमझी के लिए श्राद्ध के पहले दिन आपके इस जन्म में असफल पदार्पण का पूरे नियम से तर्पण करता हूं, स्वीकार करें। इसके बाद काटजू ने भी उन्हें खूब खरी-खरी लिखी, लेकिन कुमार विश्वास का जवाब नहीं आया।

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