Breaking News

नवरात्रि: बड़ा रहस्यमयी है दुर्गा सप्तशती का पाठ, रात में होती है साधना | Navaratri: The mysterious Durga Saptashati

Posted on: 11 Apr 2019 18:54 by Surbhi Bhawsar
नवरात्रि: बड़ा रहस्यमयी है दुर्गा सप्तशती का पाठ, रात में होती है साधना | Navaratri: The mysterious Durga Saptashati

नवरात्रि के नौं दिन माता के भात पूरी भक्ति-भावना के साथ मां दुर्गा की पूजा करते हैं। लोग अखंड ज्योत जलाकर नवरात्रि का उपवास रखते है। इन दिनों माता के मंदिरों म भी भक्तों का तांता लगा रहा है। इन पवित्र दिनों में देवी को खुश करने के लिए लोग दुर्गा सप्तशती का पाठ करते है लेकिन यह बात बहुत कम लोग जानते है कि दुर्गा सप्तशती बहुत रहस्यमयी है। इसमें नौं रहस्य छिपे हुए है।

पहला रहस्य :

नवरात्रि की 36 रात्रियां, नवरात्रि साल के चार पवित्र माह में आती है। यह चार माह है, चैत्र, आषाढ़, अश्विन और पौष। चैत्र माह में चैत्र नवरात्रि जिसे बड़ी नवरात्रि या वसंत नवरात्रि भी कहते हैं। आषाढ़ और पौष माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। अश्‍विन माह की नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहते हैं।

दूसरा रहस्य- 9 छिद्र :

हमारे शरीर में 9 छिद्र हैं। नींद में यह सभी इंद्रियां या छिद्र लुप्त होकर बस मन ही जाग्रत रहता है। नौं अंगों को पवित्र और शुद्ध करेंगे तो मन निर्मल होगा और छठी इंद्री को जाग्रत करेगा। नींद में यह सभी इंद्रियां या छिद्र लुप्त होकर बस मन ही जाग्रत रहता है। वर्ष की 36 नवरात्रियों में उपवास रखने से अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई हो जाती है।

तीसरा रहस्य- पूर्ण संयम :

इन नौं दिनों में मद्यपान और मांस-भक्षण वर्जित माना गया है। उपवास में रहकर इन नौ दिनों में की गई हर तरह की साधनाएं और मनकामनाएं पूर्ण होती है। जो व्यक्ति ऐसा अपराध करता है निश्‍चित ही वह माता के प्रति असम्मान प्रकट करता है।

चौथा रहस्य -पवित्र है ये रात्रियां :

नवरात्र शब्द से ‘नव अहोरात्र’ अर्थात विशेष रात्रियों का बोध होता है। इन रात्रियों में किए गए शुभ संकल्प सिद्ध होते हैं। दिन की अपेक्षा यदि रात्रि में आवाज दी जाए तो वह बहुत दूर तक जाती है। इन रात्रियों में प्रकृति के बहुत सारे अवरोध खत्म हो जाते हैं। इसीलिए इन रात्रियों में सिद्धि और साधना की जाती है।

पांचवां रहस्य – 9 देवियां :

दुर्गा सप्तशती के अनुसार इनके अन्य रूप भी हैं:- ब्राह्मणी, महेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, नरसिंही, ऐन्द्री, शिवदूती, भीमादेवी, भ्रामरी, शाकम्भरी, आदिशक्ति और रक्तदन्तिका। वैसे तो माता के ये नौ रूप माने जाते है – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री का पूजन विधि विधान से किया जाता है। कहते हैं कि कात्यायनी ने ही महिषासुर का वध किया था इसलिए उन्हें महिषासुरमर्दिनी भी कहते हैं।

छठा रहस्य – नौ भोग और औषधि :

शैलपुत्री कुट्टू और हरड़, ब्रह्मचारिणी दूध-दही और ब्राह्मी, चन्द्रघंटा चौलाई और चन्दुसूर, कूष्मांडा पेठा, स्कंदमाता श्यामक चावल और अलसी, कात्यायनी हरी तरकारी और मोइया, कालरात्रि कालीमिर्च, तुलसी और नागदौन, महागौरी साबूदाना तुलसी, सिद्धिदात्री आंवला और शतावरी।

सातवां रहस्य -अलग अलग देवियां :

आदि शक्ति अम्बिका सर्वोच्च है और उसी के कई रूप हैं। देवियों में त्रिदेवी, नवदुर्गा, दशमहाविद्या और चौसठ योगिनियों का समूह है। सती, पार्वती, उमा और काली माता भगवान शंकर की पत्नियां हैं। अम्बिका ने ही दुर्गमासुर का वध किया था इसीलिए उन्हें दुर्गा माता कहा जाता है।

आठवां रहस्य- दशमहाविद्याएं :

नवदुर्गा में दशमहाविद्याओं की भी पूजा होती है। इनके नाम है- पहला- काली, दूसरा- तारा, तीसरा- छिन्नमस्ता, चौथा- षोडशी, पांचवां- भुवनेश्वरी, छठा- त्रिपुरभैरवी, सातवां- धूमावती, आठवां- बगलामुखी, नौंवां- मातंगी और दसवां- कमला।

नौवां रहस्य – देवियों की पहचान :

प्रत्येक देवी को उनके वाहन, भु्जा और अस्त्र-शस्त्र से पहचाना जाता है। जैसे अष्टभुजाधारी देवी दुर्गा और कात्यायनी सिंह पर सवार हैं तो माता पार्वती, चन्द्रघंटा और कुष्मांडा शेर पर विराजमान हैं। शैलपुत्री और महागौरी वृषभ पर, कालरात्रि गधे पर और सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान हैं। इसी तरह सभी देवियों की अलग अलग सवारी हैं।

Latest News

Copyrights © Ghamasan.com