MP : किसानों के मुद्दे पर फिर गर्माई सियासत, कांग्रेस-बीजेपी में छिड़ी राजनीतिक जंग

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इंदौर। मध्यप्रदेश में किसानों के मुआवजे की बात को लेकर एक बार फिर प्रदेश के मुख्य राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक जंग शुरू हो गई है। मालवा और अन्य कुछ इलाकों में किसानों की मुख्य फसल सोयाबीन में अफलन के कारण दोनों दल एक बार फिर आमने-सामने नजर आ रहे हैं। इससे पहले विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा उठाकर जीत दर्ज कर ली थी।

भाजपा के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने गुरूवार को प्रदेश के मालवा इलाके में देवास और सीहोर जिले के किसानों से मिलकर सोयाबीन फसल में अफलन की स्थिति से निपटने में मदद देने का आग्रह करते हुए मुआवजे की मांग की। उन्होंने यहाँ तक कहा कि वे प्रदेश के किसानों के साथ खड़े हैं और उनकी हक़ की लड़ाई में सडकों पर उतरने की जरूरत पड़ी तो भी पीछे नहीं हटेंगे। हम किसानों को अकेला नहीं छोड़ेंगे। सरकार को तत्काल प्रभावित फसल का सर्वे कर किसानों को राहत राशि प्रदान की जानी चाहिए.

उधर कांग्रेस सरकार के काबिना मंत्री सज्जनसिंह वर्मा ने भी देवास जिले के कन्नौद इलाके में प्रभावित फसलों का जायजा लेकर साफ कहा कि प्रदेश में कमलनाथ सरकार किसानों की हितैषी है और दुःख-दर्द में हर समय किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने खेतों का मुआयना कर किसानों से बातचीत की। उन्होंने इसके लिए कलेक्टर को क्षति का आकलन करने के निर्देश भी दिए. उन्होंने साफ किया कि एक-एक किसान के खेत की जांच बारीकी से की जाए, किसानों की बात सुनी जाए और यदि फसल प्रभावित हुई है तो इसकी रिपोर्ट राज्य शासन को भेजी जाए ताकि समय रहते सरकार उन्हें मदद दे सकें।

इस मामले में पहले ही शाजापुर जिले के किसान चक्का जाम कर मुआवजे की मांग कर चुके हैं। बड़ी बात यह है कि यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग में रंगने लगा है। प्रदेश में किसानों का सबसे बड़ा वोट बैंक है और ऐसे में कोई भी राजनीतिक दल किसानों को अपने साथ जोड़ने का मोह नहीं छोड़ पाता। यही स्थिति विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भी बनी थी, जब दो लाख रूपये तक के क़र्ज माफी की घोषणा को अपने वचन पत्र में शामिल कर कांग्रेस ने बाजी मार ली थी। अब सत्ता जाने के बाद भाजपा भी किसानों में अपना खोया हुआ जनाधार फिर से मजबूत करने की तैयारी कर रही है।

भाजपा इसे लेकर फिलहाल किसानों का मन टटोल रही है। यदि किसानों के मन में इस मुद्दे पर सरकार के प्रति थोडा भी असंतोष नजर आएगा तो भाजपा उसे भुनाने में देर नहीं करेगी। शिवराज के बयान को इसी कड़ी में देखा जा रहा है। उधर कांग्रेस इस कदम को पहले ही पहचान चुकी है और किसानों को हुई क्षति का आकलन करने के बहाने किसानों को अपने साथ जोड़े रखने की कवायद कर रही है।

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