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वाह शिवराज जी…सच्चाई जुबां पर आ ही गई !

राजेश ज्वेल

यह तय है कि अब कोरोना से जनता को लडना है, क्योंकि हमारी केंद्रीय सरकार राज्यों के चुनावों में व्यस्त हो गई है। कहीं सरकार बनाना है, तो कहीं बचाना है। वर्चुअल रैली और सभाओं में ना मजदूरों, ना कोरोना और ना चैपट अर्थव्यवस्था की चिंता है, सिर्फ अपनी पीठ थपथपाने के करतब है। अपने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान ने तो और भी गजब कर दिया। इंदौर की रेसीडेंसी में सांवेर के कार्यकर्ताओं के बीच कांग्रेस सरकार गिराने की सच्चाई कुबूल कर ली। यह तो सबको पता है फरवरी-मार्च में जब इंदौर सहित प्रदेश में कोरोना फैला तब कांग्रेस सरकार बचाने में और भाजपा बनाने में व्यस्त थी।

मुख्यमंत्री का जो ऑडियो चर्चा में है। उसमें वे स्पष्ट कह रहे हैं कि केन्द्रीय नेतृत्व का ही फैसला था कि कांग्रेस सरकार गिराकर भाजपा सरकार बनाई जाए और यह काम ज्योतिरादित्य सिंधिया और तुलसी सिलावट के बिना नहीं हो सकता था। अब अगर तुलसी भैया सांवेर का उपचुनाव नहीं जीते तो वे भी मुख्यमंत्री नहीं रह पाएंगे। जिसके चलते मुख्यमंत्री को सांवेर के कार्यकर्ताओं को यह संकल्प भी दिलाना पड़ा कि चाहे कुछ भी जाए, हर हाल में सांवेर जीतना और भाजपा सरकार को बचाना है। इसके लिए पार्टी को माँ बताते हुए उसके दूध की लाज रखने तक का वास्ता दिया गया।

अब शिवराज जी की इस पुष्टि के बाद सियासी बवाल मचना तय है। हालांकि पप्पू कांग्रेस इस तरह के मुद्दों को भुनाने में हमेशा फिसड्डी ही रही है, वरना अगर देश में भाजपा जैसा विपक्ष होता तो मजदूरों के पलायन से लेकर बिना प्लानिंग के लॉकडाउन की विफलताओं के साथ इस ऑडियो पर जमकर छाती-माथा कूटते हुए शोर मचाता और जनता को भी साथ कर थाली-कटोरी तक बजवा देता। कुल मिलाकर जनता को ही खुद की सुरक्षा के साथ आर्थिक मोर्चे से भी निपटना पड़ेगा, क्योंकि सरकार बहादुर तो पश्चिम बंगाल, बिहार और मध्यप्रदेश के चुनावों में व्यस्त हो गई। इसलिए अब कोरोना के सामने आप और हम ही है…करो मुकाबला!