शिक्षा मंत्रालय नए वर्ष में ‘वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन’ (ONOS) नाम की नई पहल शुरू करने जा रहा है। इस पहल के तहत सभी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक शोध पत्रों और जर्नल का सब्सक्रिप्शन आम लोगों के साथ-साथ विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अनुसंधान संगठनों को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे आम लोगों को भी को लाभ मिल सकेगा। इसके लिए 70 प्रकाशकों की कोर कमेटी का गठन किया जा चुका है और इसका खाका तैयार करने पर विचार कर रही है।

MoE द्वारा जारी बयान के मुताबिक, इस नए प्रारुप के जरिए ऐसे रिसर्च स्कॉलर की सामग्री का सब्सक्रिप्शन सभी के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे किसी भी उच्च शिक्षा अथवा अनुसधांन संगठनों के द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा हो। इसमें राष्ट्रीय स्तर के प्रकाशकों और उनके डाटाबेस को शामिल किया जाएगा।
बता दें कि इस पहल की कवायद भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय द्वारा की गई है।

इस मॉडल से इन विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

ONOS प्रारुप के लागू होने के बाद ऐसे सभी उम्मीदवारों को सीधा लाभ मिलेगा जो किसी भी स्तर पर रिसर्च कार्य में शामिल होंगे। इससे लाभान्वित होने वाले संस्थानों की सूची में सभी प्राथमिक संस्थान, सरकारी संस्थान, सरकार द्वारा वित्तपोषित शैक्षणिक संस्थान और अनुसंधान एवं विकास संस्थान हैं। इस बारे में किसी भी तरह की विस्तृत जानकारी हासिल करने के लिए युवाओं को MoE की आधिकारिक वेबसाइट पर भी चैक कर सकते है।

इन संस्थाओं को मिलेगा लाभ

इस सब्सक्रिप्शन मॉडल का लाभ सरकारी और अर्धसरकारी संगठनों के अलवा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST), वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (CSIR), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (ICAR), परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE), जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (ICMR), रक्षा अनुसंधान और विकास अनुसंधान (DRDO) और विभिन्न मंत्रालयों की अनुसंधान प्रयोगशलाओं द्वारा भी उठाया जा सकेगा।।इसके अलावा कई अन्य संस्थानों के भी इस प्रक्रिया में शामिल होने से सीधे तौर पर रिसर्च को बेहतर बनाना संभव हो पाएगा।

Also Read : Sharaddha Murder Case : दिल्ली पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी, महरौली के जंगल में मिली खोपड़ी और जबड़े का हिस्सा

शिक्षा के क्षेत्र में लागू होन वाले ONOS मॉडल की लांचिग से बेहतर रीसर्च सामाग्री को विश्वस्तरीय लेवल पर ई-संसाधनों के माध्यम से देख पाना संभव हो सकेगा। कई स्त्रोतो से मिली जानकारी के अनुसार इस मसौदे पर कार्य कर रहे 70 प्रकाशकों के नवीनीकरण को रोक दिया गया है।