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चलो खत्म हुआ हाई प्रोफाइल अफवाहों का एक और दौर

Posted on: 28 Apr 2019 18:43 by Surbhi Bhawsar
चलो खत्म हुआ हाई प्रोफाइल अफवाहों का एक और दौर

काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में नरेंद्र मोदी के भीड़भरे रोड शो और नामांकन पत्र दाखिल करने के साथ ही कांग्रेस की ओर से अजय राय को प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद वहां की चुनावी तस्वीर या यों कहें नतीजे तक की तस्वीर साफ हो चुकी है। इस सारी हकीकत ने हाई प्रोफाइल अफवाहों के उस दौर को तो विराम दे ही दिया, जिसमें प्रियंका वाड्रा के वाराणसी से चुनाव लड़ने से लेकर बतौर सुरक्षा नरेंद्र मोदी के मध्यप्रदेश की व्यवसायिक राजधानी इंदौरर से पर्चा दाखिल करने तक की बातें हो रही थी।

इधर भाजपा इंदौर का प्रत्याशी तय नहीं कर पा रही थी औऱ उधर कांग्रेस असमंजस में थी कि मोदी के सामने किसकी बलि दी जाए। नाम सामने आया वही पुराना अजय राय का। वे वाराणसी के ही बाशिंदे हैं औऱ पिछली बार नरेंद्र मोदी व अरविंद केजरीवार के बीच के हाई प्रोफाइल चुनाव के बीच जमानत जब्त करा चुके हैं। फिर भी उनकी कांग्रेस में निष्ठा अतुलनीय है। पिछली बार भी जब उनका चयन बतौर कांग्रेस उम्मीदवार किया गया था तब भी निर्लिप्त भाव से कहते पाए गए थे- प्रियंकाजी का फोन आया था, आप चुनाव लड़ें, हम मदद करेंगे। मैं तैयार हो गया। हालांकि तमाम तरह की मदद के बाद भी वे खासे अंतर से पराजित हो गए थे।

यह तथ्य भी है कि वाराणसी से जीतने के पहले तक नरेंद्र मोदी का आत्मविश्वास भी डिगा हुआ ही था, क्योंकि उन्होंने गुजरात के वड़ोदरा से भी नामांकन पत्र दाखिल किया था। वे दोनों जगह से जीते और फिर वड़ोदरा सीट खाली कर दी थी। अब बात करें जमा पूंजी की तो मोदी ने नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में २०१४ से आज तक की सालाना आमदनी का खुलासा किया है। यह आमदनी 2014 में 9.70 लाख रुपए,

2015 में 8.59 लाख रुपए, 2016 में 19.93 लाख रुपए, 2017 में 14.60 लाख रुपए एवं 2018 में 19.9 लाख रुपए रही। फिलवक्त उनकी चल संपत्ति 1.40 करोड़ से कुछ ज्यादा ही है। इसमें 45 ग्राम वजनी सोने की चार अंगूठियां और सवा करोड़ रुपए से ज्यादा की एफडी शुमार है। इसके अलावा 1.10 करोड़ का घर भी उनके पास है। यह मिलाकर सकल संपत्ति ढाई करोड़ के आसपास बैठती है। वैसे मार्च 2018 तक उनके पास लगभग सवा दो करोड़ की संपत्ति थी, जिसकी जानकारी पीएमओ की वेबसाइट पर दर्ज है। यानी सालभर में दस फीसदी के आसपास बढ़ोतरी। यह जीडीपी की ग्रोथ रेट से तो ज्यादा ही है। अलबत्ता उनकी वैश्विक ख्याति जरूर कई गुना बढ़ गई है।

@जोग लिखी

 

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