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जानिए कौन थे वो महान व्यक्ति जिनके रूप में मनाया जाता है शिक्षक दिवस

Posted on: 05 Sep 2018 08:15 by Rakesh Saini
जानिए कौन थे वो महान व्यक्ति जिनके रूप में मनाया जाता है शिक्षक दिवस

आज यानि 5 सितंबर का दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।  हर किसी के मन में यह विचार जरूर होता है कि ​यह इसी दिन ही क्यों मनाया जाता है? आज आपकों हम ऐसे ही एक शिक्षक के बारे में बताने जा रहे है जिनके रूप में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। दरअसल शिक्षक समाज का वो आईना है जो बिना किसी मोह के इस समाज में कुछ नया तराशते रहते है। शिक्षक का काम किताबी ज्ञान देना ही नहीं ​होता है, बल्कि सामाजिक परिस्थितियों से छात्रों को परिचित कराना भी होता है। आइए जानते है शिक्षक दिवस से जुड़ी कुछ बातें।

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बता दें कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनके जन्मदिवस के उपलक्ष्य में शिक्षक दिवस मनाकर डॉ. राधाकृष्णन के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता हैै।​ शिक्षकों की इसी महत्ता को सही स्थान दिलाने के लिए सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने पुरजोर कोशिशें की, जिन्होंने अपने को दुनिया में एक बेहतरीन शिक्षक के रूप में साबित किया. आज हर किसी की जुबा पर उनका नाम रहता है।


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स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति व दूसरे राष्ट्रपति के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को दक्षिण भारत में चेन्नई से 40 मील उत्तर पूर्व में तिरूतनी नामक स्थान पर हुआ था। इनका पूरा बचपन धार्मिक स्थानों पर बीता, वहीं राधाकृष्णन की आरंभिक शिक्षा तिरूवल्लुर के गौड़ी स्कूल और तिरूपति मिशन स्कूल में हुई. इसके बाद मद्रास किश्चियन कॉलेज से उन्होंने पढ़ाई पूरी की और स्नातक की उपाधि मद्रास से प्राप्त की।

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1929 में उनको आॅक्फोर्ड के मैनचेस्टर कॉलेज के प्रिंसिपल जे इस्टिन कारपेंटर ने अध्यापक के लिए आमंत्रित किया. इसके बाद ही उन्होंने अपना जन्मदिवस शिक्षक दिवस के रूप में मनाने के लिए कहा था। लेकिन उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि भौतिकता की आंधी में शिक्षक दिवस तब्दील होकर टीचर्स डे हो जाएगा. आज के छात्रों की नजरों में टीचर्स डे टीचरों को खुश करने का दिन होता है। उन्हें पुरस्कार और कार्ड भेंट किये जाते है। बता दे कि सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने इसलिए इस दिन को अपने जन्मदिन के रूप में मनाने को कहा था क्योंकि इस दिन अच्छे शिक्षकों को सम्मान मिलता रहें।

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