Happy Womens Day 2019: स्त्री शक्ति का स्वरूप है

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Kirti-kale

डॉ कीर्ति काले
([email protected])

पृथ्वी पर रहने वाली प्रत्येक महिला एवं उसके सहयोगी पुरुष को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की
हार्दिक शुभकामनाएँ।

स्त्री एवं पुरुष जीवन की गाड़ी के दो महत्वपूर्ण पहिये हैं।स्री के बिना पुरुष अधूरा है तो पुरुष के बिना स्री अपूर्ण है। संसार के समुचित संचालन एवं विकास में दोनों का समान महत्व है। लेकिन प्रकृति ने स्री को पुरुष से एक गुण अतिरिक्त दिया है।वो है सृजन करने का गुण।नयी संतति को जन्म देने के इसी दैवीय गुण के कारण एक स्त्री पुरुष से अधिक संवेदनशील, एवं सहनशील होती है। जिस प्रकार कभी कभी किसी व्यक्ति के गुण ही उसकी परेशानी का कारण बन जाते हैं वैसे ही स्री की सहनशीलता एवं संवेदनशीलता के महत्त्वपूर्ण गुणों को ही उसकी कमजोरी मान लिया गया।

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सम्पूर्ण विश्व की सामाजिक संरचना में उसे दोयम दर्जे का समझा गया। शिक्षा से वंचित करके उसके विकास के मार्ग को अवरूद्ध किया गया। पारिवारिक, सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों में कोई निर्णय लेना तो दूर अपने विचार प्रकट करने से भी वंचित रखा गया।यहाँ तक कि जन्म लेने से पहले ही उसे माँ की कोख में ही मार देने की कुप्रथा भी प्रचलित हुई।

धीरे धीरे हम महिलाएँ भी स्वयं को पुरुष की दासी समझने लगीं।अपना सारा जीवन पुरुष की सेवा में समर्पित कर देने को ही जीवन का परम लक्ष्य मानने लगीं। शारीरिक बन्धन से मुक्ति तो अपेक्षाकृत शीघ्र मिल जाती है लेकिन मानसिक बन्धनों से स्वयं को मुक्त करने में पीढ़ियाँ खप जाती हैं। सम्पूर्ण विश्व में महिलाओं के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए 8 मार्च के दिन को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। प्रतिवर्ष 8 मार्च के दिन भारत में भी सरकारी,अर्ध सरकारी एवं निजी कार्यालयों एवं संस्थानों में महिला दिवस मनाया जाता है। विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया जाता है।

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इतना सब होने पर भी आए दिन महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों की घटनाओं में कमी नहीं आ रही।प्रेम अस्वीकार किए जाने पर मुँह पर एसिड फैंकने, और बलात्कार की घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ रही हैं।महिलाएँ आज रेल से लेकर रॉकेट उड़ाने लगी हैं। प्रत्येक कार्यक्षेत्र में आज महिलाओं ने अपनी योग्यता साबित की है।कहीं कहीं तो धीरे धीरे महिलाओं ने अपनी उल्लेखनीय क्षमताओं के कारण वर्चस्व कायम कर लिया है। शिक्षा एवं नर्सिंग उन्हीं में से हैं।

मेरा कार्यक्षेत्र कवि सम्मेलन है।यह क्षेत्र महिलाओं के लिए अत्यन्त कठिन रहा है।कवि सम्मेलनों के लगभग सौ वर्षों के इतिहास में पुरुष रचनाकार तो अनेक रहे लेकिन महिला रचनाकारों की संख्या अपेक्षाकृत बहुत कम रही। इसके अनेक कारण हैं।
1- कवि सम्मेलनों का अधिकतर रात के समय आयोजित होना।
2- विभिन्न शहरों में आयोजित होने के कारण यात्राओं की अधिकता का होना।
3- रचनाकारों के चयन करने में महिलाओं की भागीदारी न होना

अन्य भी पारिवारिक एवं सामाजिक परिस्थितियाँ महिला रचनाकारों के कवि सम्मेलनों में भाग लेने में बाधक बनती हैं।
कवि सम्मेलनों में महिला रचनाकारों की भागीदारी को बढ़ाने एवं कवि सम्मेलनों की गुणवत्ता में वृद्धि करने के महति संकल्प को लेकर मैंने कवि सम्मेलनों के संचालन करने का दायित्व सम्हाला। साथ ही अनेक कवयित्री सम्मेलन आयोजित किए एवं करवाए। जिनमें कवयित्रियों को अपनी कविताएँ प्रस्तुत करने का अधिक अवसर प्राप्त हुआ।

कवि सम्मेलन में महिला रचनाकार को शो पीस की तरह प्रस्तुत किए जाने का कहीं कहीं चलन है।निम्नस्तरीय छींटाकशी करना आम बात समझी जाती है। पुरुष संचालक एवं कवयित्री के बीच पूर्व नियोजित अश्लील नोंक-झोंक से कवि सम्मेलनों की गरिमा का हनन हुआ है।जिस कारण श्रेष्ठ एवं जेन्यूइन कवयित्रियाँ कवि सम्मेलन के मंच पर चढ़ने में हिचकने लगी हैं। हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री महीयसी महादेवी वर्मा जी ने भी इसी कारण कवि सम्मेलनों को नमस्कार कर लिया था। ईश्वर की कृपा है कि बड़े एवं समृद्ध मंच आज भी इस बुराई से बचे हुए हैं। लेकिन कब तक बचे रहेंगे पता नहीं।

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वर्तमान समय में स्थितियों में सुधार हुआ है।यात्राएँ सरल हो गयीं हैं। महिला रचनाकारों में आत्मविश्वास बढ़ा है। वर्तमान सरकार द्वारा चलाए जा रहे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के कारण सरकारी एवं गैर-सरकारी क्षेत्रों द्वारा आयोजित किए जाने वाले कवि सम्मेलनों में आयोजकों की ओर से कवयित्रियों की मंच पर संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण महिलाओं की काव्य प्रतिभा को सीधे तौर पर अभिव्यक्त होने का अवसर प्राप्त हो रहा है। टीवी के अनेक चैनलों पर कविता के कार्यक्रम होने लगे हैं जिसमें महिला रचनाकारों को अवसर प्राप्त हो रहा है। मुझे लगता है कि
कवि सम्मेलनों में कवयित्रियों का भविष्य उज्जवल है।

महत्वपूर्ण –
किसी भी महिला का शोषण तभी होता है जब प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उसकी सहमति हो।
स्त्री शक्ति का स्वरूप है।अनन्त क्षमताओं का भण्डार है।उसकी योग्यता असीमित है।
आवश्यकता ये है हम महिलाएँ स्वयं के सामर्थ्य को पहचानें।स्वयं को भोग की सामग्री की तरह प्रस्तुत न करें।जिस भी क्षेत्र में हम कार्यरत हैं उसके अनुसार दिन प्रति दिन अपनी योग्यता में वृद्धि करें।अप्रिय स्थिति आने पर चुप न रहें , वरन् खुलकर विरोध करें। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। शॉर्टकट अपनाने पर समझौते करने पड़ते हैं जो भविष्य में अत्यन्त घातक सिद्ध होते हैं।महिलाएँ जिस दिन स्वयं को शक्तिरूपा मान लेंगीं उस दिन महिला दिवस मनाना सार्थक हो जाएगा।

 

लेखिका अन्तर्राष्ट्रीय कवयित्री एवं प्रसिद्ध मंच संचालिका है

 

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