सीएम योगी का सख्त रूख, भारत मंडपम कांड पर जताई कड़ी नाराजगी, विधानसभा में AI को लेकर किया बड़ा ऐलान

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By Raj RathorePublished On: February 20, 2026

लखनऊ में विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक नोकझोंक देखने को मिली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी की ओर से उठाए गए मुद्दों पर जवाब देते हुए नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय को संबोधित किया और चर्चा के दौरान शिवपाल यादव का नाम लेकर टिप्पणी की। मुख्यमंत्री के इस जवाब को सपा पर सीधा राजनीतिक हमला माना जा रहा है।

बहस की शुरुआत विपक्ष के आरोपों और सरकार से जवाब मांगने के साथ हुई। इसी क्रम में माता प्रसाद पांडेय ने सदन में अपना पक्ष रखा। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष की कुछ बातों में उन्हें “चाचा का असर” दिखाई देता है। यह टिप्पणी सीधे तौर पर शिवपाल यादव की ओर इशारा मानी गई।

“आपकी बातों में चाचा का असर साफ दिखता है।” — योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में एआई कॉन्फ्रेंस से जुड़े एक पुराने घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे विपक्ष की राजनीतिक लाइन और उसके तर्कों से जोड़ते हुए कहा कि जिन मुद्दों को बार-बार उठाया जा रहा है, उनमें तथ्य की तुलना में राजनीतिक संकेत ज्यादा हैं। इस हिस्से ने बहस को और तेज कर दिया।

सदन में बयान, बाहर राजनीतिक संदेश

विधानसभा की बहस अक्सर सिर्फ सदन तक सीमित नहीं रहती। इस बार भी वही हुआ। मुख्यमंत्री की टिप्पणी का असर तुरंत राजनीतिक गलियारों में दिखा। सत्ता पक्ष ने इसे विपक्ष की रणनीति पर जवाब बताया, जबकि सपा खेमे ने इसे राजनीतिक कटाक्ष माना।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में सपा के भीतर विभिन्न वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को लेकर पहले से चर्चा रहती है। ऐसे में शिवपाल यादव का नाम लेकर किया गया सार्वजनिक संदर्भ सिर्फ व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि विपक्षी नेतृत्व की दिशा पर राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है।

माता प्रसाद पांडेय की भूमिका पर बढ़ी चर्चा

नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद माता प्रसाद पांडेय लगातार सदन में सरकार को घेरने की कोशिश करते रहे हैं। इस बहस में भी उन्होंने सरकार से जवाबदेही का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया के बाद चर्चा का फोकस कुछ देर के लिए मूल मुद्दे से हटकर सपा के आंतरिक प्रभाव और नेतृत्व समीकरणों की ओर चला गया।

सत्ता पक्ष की ओर से यह संदेश देने की कोशिश दिखी कि विपक्ष के आरोपों के पीछे राजनीतिक रणनीति काम कर रही है। दूसरी तरफ विपक्ष ने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा कि सदन में उठाए गए प्रश्न सार्वजनिक महत्व के हैं और उनका जवाब तथ्यों पर होना चाहिए।

एआई कॉन्फ्रेंस घटना का संदर्भ क्यों अहम

बहस में एआई कॉन्फ्रेंस से जुड़ी पुरानी घटना का उल्लेख इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह मुद्दा पहले भी राजनीतिक तौर पर उठ चुका है। सदन में इस संदर्भ के आने से यह स्पष्ट हुआ कि पुरानी घटनाएं चुनावी और संसदीय राजनीति दोनों में अब भी उपयोग में लाई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने इस संदर्भ का इस्तेमाल विपक्ष की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के लिए किया, जबकि विपक्ष ने इसे मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया। हालांकि, कार्यवाही के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क दर्ज कराए और बहस आगे बढ़ी।

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम से इतना साफ है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में सदन के भीतर की भाषा और संकेत आने वाले दिनों की राजनीतिक लाइन तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी और सपा की प्रतिक्रिया ने यह दिखा दिया है कि विधानसभा की बहस अब सीधे राजनीतिक संदेशों का मंच बन चुकी है।