Yogi Adityanath : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे के बाद शनिवार शाम लखनऊ के लिए रवाना हो गए। दौरे के अंतिम दिन वह अपने पैतृक गांव पंचूर में स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों से घुलते-मिलते नजर आए। सुबह से ही उनके आवास पर ऋषिकेश, कोटद्वार और देहरादून समेत आसपास के इलाकों से लोग उनसे मिलने के लिए जमा थे।
गांव भ्रमण के दौरान सीएम योगी का एक अलग ही रूप देखने को मिला। उन्होंने रास्ते में मिले बच्चों के साथ काफी समय बिताया और उन्हें अपना स्नेह दिया। इसी दौरान एक बच्चे ने जब उन्हें फूल देकर पैर छुए, तो योगी ने उसे चॉकलेट की पोटली दी। जब बच्चा वह पोटली अपने दादा को देने लगा, तो सीएम योगी ने मुस्कुराते हुए कहा, “हम भी तेरे दादा लगते हैं।”
लोगों से की मुलाकात
शनिवार को दिनभर उनके आवास पर मिलने वालों का तांता लगा रहा। एक नवविवाहित जोड़ा, शिवानी बडोला और योगेश सेमवाल, भी उनसे आशीर्वाद लेने पहुंचा। सीएम योगी ने उन्हें सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दिया और उनके साथ तस्वीर भी खिंचवाई। वहीं, कुछ युवतियां अपनी शादी का कार्ड लेकर पहुंचीं और उन्हें विवाह में आने का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया।
कांडी निवासी जयवीर नेगी ने बताया कि जब उन्होंने सीएम योगी को अपना नाम बताया तो वह पहचान नहीं पाए, लेकिन जैसे ही उन्होंने अपने पिता और चाचा का नाम लिया, योगी ने तुरंत उन्हें पहचान लिया और परिवार का हालचाल पूछा।
विकास कार्यों का निरीक्षण
अपने निजी कार्यक्रमों के अलावा सीएम योगी ने क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का भी जायजा लिया। उन्होंने जनता इंटर कॉलेज, यमकेश्वर में नवनिर्मित दो मंजिला भवन का लोकार्पण किया और पंचूर गांव में बन रहे मंदिर के निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया।
दोपहर करीब सवा तीन बजे वह गुरु गोरखनाथ महाविद्यालय पहुंचे, जहां प्राचार्य प्रो. योगेश कुमार ने उनका स्वागत किया। योगी ने परिसर में महंत अवैद्यनाथ की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने 128 बटालियन के कर्नल एस. सिद्दीकी और प्राचार्य के साथ मिलकर आम का पौधा लगाया। उन्होंने महाविद्यालय प्रशासन को स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल फलदार पौधे लगाने का निर्देश दिया।
सीएम योगी ने महाविद्यालय में इसी सत्र से शुरू हो रही बीएससी कक्षाओं के लिए बनी नई विज्ञान और कंप्यूटर लैब का भी निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय विधायक रेनू बिष्ट को खेल के मैदान को एक मिनी स्टेडियम के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।
शाम को अपनी मां से मिलने के बाद वह घर से बाहर निकले और अपनी बहनों व अन्य लोगों का अभिवादन करते हुए विदा हुए। दोपहर साढ़े तीन बजे के करीब वह बिथ्याणी महाविद्यालय के हेलीपैड से जौलीग्रांट एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए।











